Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

केरल : मंत्री से विरोध जताया, बीमारी में तबादला पाया..

By   /  June 29, 2014  /  3 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

केरल में कुछ रोज़ पूर्व घटे एक नाटकीय घटनाक्रम में एक गर्ल्स हाई स्कूल की प्रिंसिपल का तबादला कर दिया गया जब उन्होंने कांग्रेस सरकार में राज्य शिक्षा मंत्री के एक पूर्व नियोजित कार्यक्रम में देर होने पर स्कूल के गेट बंद करवा दिए थे. ख़बरों के अनुसार कार्यक्रम में साढ़े तीन घंटे देर से पहुंचे थे. इस तबादले की सूचना के बाद राज्य में शिक्षा मंत्री के खिलाफ आक्रोश और विरोध की लहर है.

उपरोक्त घटना 16 जून की है जब शिक्षा मंत्री पी के अब्दु रब्ब सरकारी कन्या विद्यालय, कॉटन हिल, थिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने तयशुP.K. Abdu Rabbदा समय से लगभग साढ़े तीन घंटे देर से पहुंचे. मंत्री जी को कार्यक्रम में सुबह 9.30 बजे पहुंचना था लेकिन अपने काफिले के साथ मंत्री जी लगभग एक बजे दोपहर में पहुंचे. काफी देर इंतज़ार करने के बाद जब 11.30 तक मंत्री जी नहीं आये तो प्रधानाचार्या के के उर्मिला देवी, जो कि स्कूल के गेट पर सारे इन्तेज़ामों के साथ इंतजार कर रही थी, ने स्वागत की औपचारिकता निभाने का कार्य सह-प्रधानाचार्य को सौंप दिया और स्वयं ऑफिस के अन्य कार्य निपटाने वापस कार्यालय में लौट गयीं.

प्रसंगवश यहाँ बताते चलें कि 55 वर्षीय प्रधानाचार्या गंभीर रोग से पीड़ित जिसमें दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता. उनके इस रोग का इलाज चार वर्षों से चल रहा है. आखिरकार लगभग 12.30 बजे के बाद जब मंत्री जी स्कूल पहुंचे तो स्वागत हेतु किसी कर्मचारी को न पा कर, गेट बंद देख कर आग बबूला हो गए. बाद में गेट मंत्री के सुरक्षा स्टाफ ने खोला.

बाद में कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्या ने अपने भाषण में कहा कि वीआईपी कार्यक्रम को कुछ ऐसे निर्धारित किये जाने की आवश्यकता बताई जिससे कक्षायें बाधित न हों. उन्होंने आगे कहा कि वो मंत्री जी के व्यस्त कार्यक्रम का सम्मान करती है लेकिन वीआइपी कार्यक्रम को या तो पक्का होना चाहिए या इस तरह का जिनसे बच्चों की पढाई में बाधा न पहुंचे. छात्र-छात्राओं का पढाई का नुकसान अच्छी बात नहीं है. आयोजकों को इस बात का ख्याल रखना होगा.

इसके बाद गत 20 जून को प्रधानाचार्या के के उर्मिला देवी को कारण बताओ नोटिस प्राप्त हुआ जिसे शिक्षा विभाग ने भेजा था. इस नोटिस में देवी से पूछा गया था कि मंत्री के आगमन से पूर्व गेट क्यों बंद कर दिए गए और उन्होंने मंत्री की प्रतिष्ठा के विरुद्ध बयान क्यों दिया. हालांकि विभाग ने जवाब के लिए दो हफ्ते का वक़्त दिया था लेकिन जवाब का इंतज़ार न करते हुए के के उर्मिला देवी का तबादला इसी हफ्ते कर दिया गया. देवी, जिनकी सेवानिवृत्ति में महज एक साल बचा है और ब्रेन फंगस का इलाज चल रहा है को इस स्थान से 45 किमी दूर दूसरे विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है.

गुरुवार को कम्युनिस्ट पार्टी(मा) के नेतृत्व में विपक्ष ने तबादला निरस्त किये जाने की मांग को लेकर लगातार दूसरे दिन वाक आउट किया. देवी के विरुद्ध कड़े रुख से पीछे हटते हुए मुख्यमंत्री ओम्मन चंडी ने कहा कि देवी चाहें तो इस तबादले के खिलाफ अपील कर सकती हैं. ये दंडात्मक कार्यवाही नहीं है, सिर्फ रूटीन तबादले हैं.

कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक वी शिवान्कुट्टी, जिन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था, ने शिक्षा मंत्री पर तुच्छ आचरण दिखने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी मंत्री का आचरण समय निर्धारण व्यवस्था के इतना प्रतिकूल होना चाहिये और क्या स्कूलों के गेट पढ़ाई के दौरान भी खुले होने चाहिए?

देवी ने मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये सारी कार्यवाही उनके दलित होने की वजह से की जा रही है वरना विभाग खुद भी जानता है कि गलती मंत्री की है. अब्दु रब्ब ने जवाब में कहा–”उनके ऊपर मिथ्या आरोप लगाये जा रहे हैं और देवी का तबादला एक रूटीन तबादला है जिसकी सिफारिश विभाग ने देवी के विरुद्ध मिली अनियमितता और गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद की थी. मैंने कार्यक्रम में देर से पहुँचने के तुरंत बाद क्षमा मांग ली थी लेकिन प्रधानाचार्या ने बात को तूल दे कर मुझे अपमानित करने की ठान रखी थी.”

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. ये जनतांत्रिक सामंत शाही है, मंत्री खुद को राजा समझ राज करते हैं व इस सिद्धांत पर चलते हैं कि राजा कभी गलती नहीं करता , राजा कभी गलत नहीं होता , राजा के विरुद्ध किसी को नज़र उठाने व कुछ बोलने का हक़ नहीं इसी विचारधारा ने देश को इस गर्त पर पहुंचा दिया है

  2. ये जनतांत्रिक सामंत शाही है, मंत्री खुद को राजा समझ राज करते हैं व इस सिद्धांत पर चलते हैं कि राजा कभी गलती नहीं करता , राजा कभी गलत नहीं होता , राजा के विरुद्ध किसी को नज़र उठाने व कुछ बोलने का हक़ नहीं इसी विचारधारा ने देश को इस गर्त पर पहुंचा दिया है

  3. Actin of te PRINCIPAL is humiliating to Minister As he had his programe so all the arrangements be made by her, But any unavoidable delays Had happened, but this factor gets irritations to other people Who are waiting for him<> however it the gentle action to inform all concerned of delay Of time To the extent He may be available at the site But inordinate delay uninformed may cause A Violence <><. खबर

    केरल में कुछ रोज़ पूर्व घटे एक नाटकीय घटनाक्रम में एक गर्ल्स हाई स्कूल की प्रिंसिपल का तबादला कर<> The follwing statement Needs attentions<><><>अनियमितता और गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद की थी. मैंने कार्यक्रम में देर से पहुँचने के तुरंत बाद क्षमा मांग ली थी लेकिन प्रधानाचार्या ने बात को तूल दे कर मुझे अपमानित करने की ठान रखी थी.”

    Read more: http://mediadarbar.com/27667/ailing-principal-transferred-after-opposing-minister-in-kerala/#ixzz361wUgO7k

    Read more: http://mediadarbar.com/27667/ailing-principal-transferred-after-opposing-minister-in-kerala/#ixzz361tJkuO1

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक क्रांतिकारी सफर का दर्दनाक अंत..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: