/तापस पाल के बयान पर विवाद के बाद पत्नी ने मांगी माफ़ी..

तापस पाल के बयान पर विवाद के बाद पत्नी ने मांगी माफ़ी..

कम्युनिस्ट पार्टी (मा) के साथ हो चुकी महिलाओं को बलात्कार की धमकी देने वाला बयान दे कर तृणमूल कांग्रेस के सांसद तापस पाल फंस गए हैं. पाल के बयान पर पार्टी ने उनसे पल्ला झाड़ लिया है और उनसे बयान के बाबत जवाब तलब किया है. हालांकि पाल की पत्नी ने अपने पति द्वारा दिए गए बयान पर खेद जताते हुए माफ़ी मांगी है. पाल की पत्नी नंदिनी पाल ने एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि पाल की टिप्पणी पर परिTapas-Palवार देश से माफ़ी मांगता है. पाल को बयान देते वक़्त शब्दों के चयन को ले लार सतर्क रहना चाहिए था और बलात्कार जैसे शब्द नहीं प्रयोग करने चाहिए थे.

nandini paulदूसरी तरफ पार्टी ने भी पाल के बयान को गम्भीरता से लेते हुए 48 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है. पाल ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने रेप नहीं रेड कहा था. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ममता शर्मा ने बयान पर खेद जताते हुए कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है और भविष्य में इस तरह के बयान न हो इसलिए ज़रूरी है कि पाल के इस्तीफे की मांग की जाये. साथ ही पाल पर प्रभावी कार्यवाही की जानी चाहिए. ऐसे बयान से ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता वो भी तब जब एक जन प्रतिनिधि की तरफ से आया हो. एक तरफ देश महिलाओं को ले कर समस्याओं से जूझ रहा है और दूसरी तरफ हमारे जनप्रतिनिधि महिलाओं के बलात्कार के लिए लोगों को उकसा रहे हैं. पाल को इस्तीफ़ा देना चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए. ममता बैनर्जी पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा कि वैसे तो वे बहुत मुखर और तेज़ तर्रार हैं लेकिन अभी तक इस मामले में उनकी चुप्पी उन्हें सवालों के घेरे में खड़ा करती है.

भारतीय लोकतांत्रिक महिला संगठन की सदस्य जगमति सांगवान ने पाल के इस्तीफे से कम पर बात करने से इनकार करते हुए कहा कि वे इस मामले में स्पीकर और ममता बैनर्जी से बात करेंगी. कांग्रेस समेत लगभग सभी दलों ने इस बयां की कड़ी निंदा की है. गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस के क्रिकृष्णानगर से सांसद तापस पाल ने मई माह में सीपीआई-एम से जुडी महिलाओं के बलात्कार और हत्या करवाने सम्बंधित बयान जनता के बीच में खड़े हो कर दिया था. विडियो एक मोबाइल फोने फुटेज है जिसमें पाल को कम्युनिस्ट पार्टी-(मा) से जुड़ी महिलाओं के बलात्कार और हत्या के लिए समर्थकों को उकसाते देखा और सुना जा सकता है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.