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तनु शर्मा को न्याय दिलाने की मुहिम शुरू..

By   /  July 2, 2014  /  1 Comment

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2 जुलाई 2014 को इंडिया टीवी की एंकर तनु शर्मा, जिसने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आत्महत्या का असफल प्रयास किया था, को इंसाफ दिलाने और आरोपियों पर कानूनी प्रक्रिया का दबाव बढ़ाने के लिए नॉएडा की फिल्म सिटी में एक प्रदर्शन के लिए लोग एकत्रित हुए. इनमें महिला समाजसेवी कविता कृष्णन, वरिष्ठ मीडियाकर्मी और इंडिया टीवी के पूर्व अधिशासी संपादक प्रशांत टंडन,जेएनयू के छात्र संघ के नेता अकबर चौधरी, मीडिया एक्टिविस्ट महेंद्र मिश्र और अन्य कई लोगों ने शिरकत की.protest against india tv

ज्ञात हो कि तनु शर्मा के लिखित बयान में रजत शर्मा की पत्नी रितु धवन, अनीता शर्मा बिष्ट और एमएन प्रसाद का नाम आने के बाद भी उन पर कार्यवाही न होने और आरोपियों को बचाए जाने से क्षुब्ध हो कर मीडिया एक्टिविस्ट महेंद्र मिश्र ने एक प्रदर्शन और सभा का आह्वान किया था. आज सभी सुधिजन नॉएडा स्थित फिल्मसिटी में एकत्रित हुए और रजत शर्मा, इंडिया टीवी और पुलिस की कार्यवाही के खिलाफ एक ज्ञापन तैयार किया. इस ज्ञापन में तनु शर्मा के केस में कठोर और त्वरित कार्यवाही की मांग के साथ अनेक सुझाव भी दिए गए जिनसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न बंद करने में सहायता मिलेगी. कविता कृष्णन ने आये हुए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे मामले कहीं न कहीं राजनैतिक संरक्षण की तरफ इशारा तो करते ही हैं साथ ही साथ ये भी साबित करते हैं कि मीडिया हाउसेस में अब एक आमूलचूल सुधार की भी ज़रूरत है. उन्होंने विशाखा गाइडलाइन्स को भी कड़ाई से लागू करने पर जोर दिया.

वरिष्ठ मीडियाकर्मी और इंडिया टीवी के पूर्व अधिशासी संपादक प्रशांत टंडन ने जोर दे कर कहा कि सिर्फ महिलाओं का ही नहीं पुरुषों का भी शोषण होता है. ऐसे में कर्मचारियों के किसी भी तरह के शोषण और पत्रकारिता से जुड़े तमाम दोषों को जड़ से ख़त्म करने के लिए सिर्फ समाजसेवियों को ही नहीं, हर एक वर्ग को और सबसे बढ़ कर खुद मीडिया कर्मियों को आगे आना होगा. सब साथ मिल कर ही ऐसी बुराइयों पर विजय पा सकते हैं.

इस प्रदर्शन का एकमात्र नकारात्मक पक्ष भी खुल कर दिखा जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग, जिनसे ये मामला सबसे ज्यादा जुड़ा है वे ही अनुपस्थित थे. आश्चर्यजनक रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से कोई भी साथी शिरकत करने नहीं आया जिससे इस बात को बल मिला कि खुद मीडिया कर्मी या तो इस तरह के कृत्य के खिलाफ आवाज़ उठाने से पीछे हट रहे हैं और सरोकारी पत्रकरिता को व्यापारिक कॉर्पोरेट पत्रकारिता ने विस्थापित कर दिया है या उन्हें नौकरी के खतरे दिखा कर आवाज़ न उठाने के लिए डराया जा रहा है. इससे इन बातों को भी बल मिलता है कि मीडिया के अन्दर होने वाली घटनाओं को लेकर मीडिया खुद ही संवेदनशील नहीं है.

प्रदर्शन से पूर्व सभी ने आपने अपने विचार रखे और बाद में ये विरोध प्रदर्शन सभा में तब्दील हो गया. सभा के बाद एक ज्ञापन एसडीएम को उनके कार्यालय में सौंपा गया जिसमें तनु शर्मा को इंसाफ दिलाने और आरोपियों पर शिकंजा करने समेत अनेक सुझाव दिए गए हैं जिनसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगायी जा सके.

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  • Published: 3 years ago on July 2, 2014
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  • Last Modified: July 2, 2014 @ 10:31 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Jawahar Kaul says:

    Rajat Sharma has a big hand in bringing BJP to power,he & family can't be touched

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