/क्या समाजवादी पार्टी का किला ढह रहा है..

क्या समाजवादी पार्टी का किला ढह रहा है..

ऐसा लग रहा है कि समाजवादी पार्टी के किले में सेंध लगनी शुरू हो गयी है. फ़िलहाल चर्चा के केंद्र में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह का इलाका मैनपुरी है. शनिवार को लगभग एक दर्ज़न हथियारबंद व्यक्ति एक रिटायर्ड स्कूल टीचर विद्या देवी चौहान के कतरा स्थित में घुस गए और उन्हें और उनकी पोती मनीषा को बंधक बना लिया. इसके बाद उन्होंने दरवाज़ा भीतर से बंद कर लिया और वहां बैठ कर बीयर पी.article-2682516-1F70272F00000578-590_634x523

इसके बाद उन्होंने श्रीमती चौहान को मकान तुरंत खाली करने की धमकी भी दी. ये समाजवादी पार्टी के गुर्गो द्वारा एक पुराना और आजमाया हुआ तरीका था- घर के ऊपर सपा का झंडा टांग दो और घर तुमहरा. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. कुछ पड़ोसियों और आस पास के लोगों को गतिविधियों से ये महसूस हुआ की विद्या देवी चौहान के घर में सब कुछ ठीक नहीं है और वे सभी अपनी अपनी लाइसेंस वाली बंदूकें और अन्य हथियारों से लैस हो कर विद्या देवी चौहान के घर की तरफ बढ़ चले. विद्या देवी चौहान के कुछ रिश्तेदार, जो पास में ही रहते थे, भी आ गए जब उन्हें स्थानीय लोगों ने विद्या देवी चौहान के बंधक बनाये जाने की खबर दी. ये एक ऐसी घटना थी जो इसके पहले नहीं हुयी थी. पुलिस के इस पर कार्यवाही करने में हिचकिचाने के बाद स्थानीय लोगों ने गुंडों से खुद ही निपटने का फैसला लिया जो की सपा के इलाके में निश्चय ही अभूतपूर्व घटना थी. अंततः इंस्पेक्टर आर के चौधरी पर हमला होने के बाद पुलिस कर्मियों के सब्र का बाँध टूटा और मैनपुरी के सुपेरिटेंडेंट श्रीकांत सिंह के नेतृत्व में घर को घेर लिया और अपराधियों को समर्पण करने के लिए कहा. इसके बाद कुछ अपराधियों ने पास के नगर पालिका दफ्तर में शरण ली और कुछ ने पास के एसपी कार्यालय में जा कर उसे अन्दर से बंद कर लिया.

एस पी ने बाद में बताया कि नौ युवकों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें सुनील यादव, सोनू यादव, संदीप यादव और नन्द किशोर यादव शामिल हैं. साथ ही चार वहां भी ज़ब्त किये गए हैं जिनपर से सपा के झंडे लगे हुए हैं. इसके साथ ही पुलिस ने तीन कट्टे और दो रिवाल्वर भी बरामद किये हैं. शनिवार को हुयी घर कब्ज़ा करने की ये घटना पिछले एक महीने के दौरान हुयी छटवीं घटना है. लगभग सभी घटनाओं में सपा के झंडे लगी हुयी गाड़ियों का इस्तेमाल और सपा नेताओं के करीबी लोगों ने घटना को अंजाम दिया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.