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दिग्विजय और शिवराज: नूरा कुश्ती या सरोकार..

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ताज़ा ख़बरों के अनुसार कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक हफ्ते लम्बी भूख हड़ताल गुना में स्थित पार्टी मुख्यालय में आज शुरू कर दी है. पार्टी के अनुसार ये अनशन सरकार के उस रवैये के विरुद्ध है जिसमें उसने प्राकृतिक आपदाग्रस्त किसानों को समुचित सहायता और सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवायीं.digvijay-shivraj-sj

दिग्विजय सिंह का ये कदम फ़िलहाल विश्लेषकों की नज़र में चढ़ा हुआ है और उनकी तरफ से इस कदम का विरोध देखने में आ रहा है. गौरतलब है की कुछ रोज़ पहले तक दिग्विजय सिंह व्यापमं घोटाले के विरुद्ध शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर लगातार हमले कर रहे थे लेकिन अचनाक दिग्विजय सिंह ने व्यापमं घोटाले का साथ छोड़ कर किसानों का मुद्दा हथिया लिया. यहाँ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पूर्व नेता वी डी शर्मा का बयान महत्वपूर्ण हो जाता है जिसमें उन्होंने व्यापमं की शुरुआत दिग्विजय सिंह सरकार में होने के आरोप लगाये थे.

जिस तरह से शिवराज सिंह चौहान का विरोध छोड़ कर दिग्विजय ने अचानक एक सरोकारी मुद्दा उठाया है उसे देख कर सभी विश्लेषक चकित हैं और इस कदम में कुछ निहितार्थ बता रहे हैं. उनके अनुसार ऐसा करना दिग्विजय के स्वाभाव के साथ नहीं जाता और इसमें ज़रूर कोई बात होनी चाहिए. कुछ लोग शिवराज और दिग्विजय के बीच किसी अघोषित समझौते की भी बातें कर रहे हैं और प्रभावी हो चले सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है. सोशल मीडिया पर चर्चाओं में यहाँ तक कहा जा रहा है कि पार्टी से कोई खास सहयोग न मिलने के बाद व्यापमं घोटाले से ध्यान हटाने के लिए शिवराज ने दिग्विजय की मदद ली है और दोनों के बीच नूरा कुश्ती के ज़रिये मुद्दों से ध्यान भटका कर घोटाले पर लीपा पोती की जा रही है.

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. दिक्कत भी क्या है ? दिग्गी राजा चुनावी पराजय के बाद बिलकुल पस्त , पूर्ण बेरोजगार , खिलाडी है जिनकी दिल्ली दरबार को भी फिलहाल कोई जरुरत नहीं है,महोब्बत भी आखिर कितनी करें ? गुरु से बिन पूछे की महोब्बत शादी में भी तब्दील नहीं हुई , मीडिया का मर्ज भी चुप नहीं बैठने देता इसलिए अब भूखे कर कर लाइम लाइट में रहने का उनका यह यह अच्छा अंदाज है

  2. दिक्कत भी क्या है ? दिग्गी राजा चुनावी पराजय के बाद बिलकुल पस्त , पूर्ण बेरोजगार , खिलाडी है जिनकी दिल्ली दरबार को भी फिलहाल कोई जरुरत नहीं है,महोब्बत भी आखिर कितनी करें ? गुरु से बिन पूछे की महोब्बत शादी में भी तब्दील नहीं हुई , मीडिया का मर्ज भी चुप नहीं बैठने देता इसलिए अब भूखे कर कर लाइम लाइट में रहने का उनका यह यह अच्छा अंदाज है

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