/राहुल को लोकसभा में देख सत्ता पक्ष हुआ हैरान..

राहुल को लोकसभा में देख सत्ता पक्ष हुआ हैरान..

सोमवार को विपक्षी दल कांग्रेस ने लोकसभा में महंगाई के मुद्दे पर खूब हंगामा किया. सरकार को ऐसा होने की आशंका पहले से ही थी. लेकिन सत्ता पक्ष हैरान रह गया जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आस्तीन चढ़ाकर विरोध कर रहे अपनी पार्टी के नेताओं के साथ खड़े नजर आए.rahul gandhi

पिछली लोकसभा में बहुत कम सदन में नजर आए राहुल गांधी सोमवार को विरोध के वक्त खड़े हो गए. उनकी पार्टी के सांसद तब सरकार विरोधी नारे लग रहे थे. वह भी अपनी सीट से उठकर आगे आए और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पहले बेंच के पास खड़े हो गए. हालांकि उन्होंने सदन के बीच में जाकर नारे नहीं लगाए.
44 साल के राहुल गांधी को पिछली लोकसभा में बैक-बेंचर कहा जाता था. इस बार वह विपक्षी दलों की सीटों में तीसरी लाइन में बैठे हैं.

पत्रकारों ने जब बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूड़ी से इस बारे में सवाल पूछे तो उन्होंने कहा. ‘मैं आज थोड़ा हैरान था. विपक्ष में जाने के बाद ही सही. कम से कम राहुल को बोलते तो सुना गया. कुछ लोगों ने देखा. कुछ ने नहीं. लेकिन वह शेम शेम के नारे लगा रहे थे और बहुत आक्रामक थे. पूरे सदन ने देखा कि आज एक नई शुरुआत हुई और राहुल ने ये इसे शेम-शेम से शुरू किया. इस देश के लोग सब देख रहे हैं.’

वैसे कांग्रेस नेताओं ने इस बात का खंडन किया है कि राहुल गांधी ने कोई नारा लगाया या शेम-शेम कहा. जब राहुल गांधी की लोकसभा में हुए हंगामे में भूमिका के बारे में कांग्रेस नेता कमलनाथ से पूछा गया तो उन्होंने कहा. ‘राहुल गांधी विपक्ष के सक्रिय सदस्य हैं.’

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.