/विधायिका में होने के फायदे, पेंशन और वेतन एक साथ..

विधायिका में होने के फायदे, पेंशन और वेतन एक साथ..

सन 1921 में 15 रूपए प्रति मीटिंग मिलने वाला कुल भत्ता किस तरह से न्यूनतम 40 हज़ार रूपए मासिक हो जाता है ये आपके और हमारे लिए शोध का विषय हो सकता है. आम सरकारी कर्मचारी के तौर पर न तो आप बहु-पदासीन हो सकते हैं न ही बहु-पदानुसार पारिश्रमिक ले सकते हैं. हाँ, आप बहु-पदानुसार अतिरिक्त कार्यभार ज़रूर ग्रहण कर सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी विधायिका के सदस्य के लिए ये नियम लागू नहीं होते हैं.17088_En_L2

महाराष्ट्र विधायिका के पेंशन प्रावधानों के अनुसार सभी सदस्यों की पेंशन सिस्टम में 2013 में बदलाव किये गए हैं. इसके अनुसार किसी भी विधायक की पेंशन 25 हज़ार रूपए से बढ़ा कर 40 हज़ार रूपए कर दी गयी है. कोई भी विधायक, जिसने 5 वर्षीय कार्यकाल पूरा कर लिया है और दूसरे कार्यकाल में प्रवेश कर चुका है, 10 हज़ार रूपए अतिरिक्त पेंशन का हकदार होगा और ये 10 हज़ार रूपए की बढ़ोतरी प्रति 5 वर्ष के कार्यकाल के साथ मिलती जाएगी. इसके साथ ही वो विधायक अपनी तनख्वाह का भी हकदार होगा जिसके साथ उसे अन्य भत्ते और सुविधाएं मिलती रहेंगी. उदाहरणस्वरुप अगर कोई विधायक तीसरे कार्यकाल में है तो उसे पिछले दो कार्यकालों की पेंशन यानि 40 हज़ार रूपए, दूसरे कार्यकाल के अतिरिक्त 10 हज़ार रूपए और इस कार्यकाल की तनख्वाह (न्यूनतम 67 हज़ार रूपए) और सुविधाएं, ये सभी मिलता रहेगा. यानि लगभग सवा लाख रूपए, भत्ते और सुविधाएं. इतना ही नहीं अगर कोई विधायक सांसद है या पहले सांसद रह चुका है तो उसे इतनी आय के साथ सांसद होने की वजह से होने वाले आर्थिक लाभ और अन्य सुविधाएं पाने का हक है. सबसे आश्चर्य की बात ये आमदनी अगर तनख्वाह के मद में है तो कर योग्य नहीं है.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के विधायकों ने अपनी तनख्वाह भी तीन साल पहले ही बढ़ाई थी जिसमें न्यूनतम तनख्वाह 29 हज़ार रूपए से बढ़ा कर 67 हज़ार रूपए कर दी गयी थी. इससे खजाने पर 13 करोड़ रूपए का अतिरिक्त बोझ पड़ने की गणना की गयी थी. इसके बाद से ही पेंशन बढ़ाये जाने के कयास लग रहे थे. सन 1996 के बाद से 2011 में तनख्वाह बढ़ाई गयी थी. महाराष्ट्र में तकरीबन 1600 भूतपूर्व विधायक और उनकी विधवाएं हैं जिन पर अब प्रतिवर्ष 125 करोड़ रूपए खर्च होंगे.

इतना ही नहीं, एक विधायक बहु-पद और बहु कार्यभार ग्रहण कर सकता है जिसके लिए उसे प्रत्येक कार्यभार के लिए पृथक पारिश्रमिक दिया जाता है. यहाँ तक की विधायकों के दैनिक भत्ते भी इनकम टैक्स में एक्ट 1961 के सेक्शन 10(17) के अंतर्गत छूट के योग्य हैं. इसके अतिरिक्त अन्य भत्ते जैसे परिवहन भत्ता आदि भी सेक्शन 10(14) के अंतर्गत छूट के अधिकारी हैं.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.