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रेल बजट 2014: मुख्य बिंदु..

रेल मंत्री का नया मन्त्र है “दुनिया का सबसे बड़ा मालवाहक बनने का लक्ष्य”

आज पेश हुए सत्र 2014-15 के रेल बजट के मुख्य बिंदु:Rail Budget 2014

वित्तीय पहलू :
2013-14 में सकल यातायात प्राप्तियां ₹ 12,35,558 करोड़ रुपए थी; परिचालन अनुपात 94 प्रतिशत रहा.
– क्रॉस सब्सिडी के ज़रिये माल भाडा लगातार बढ़ाते हुए यात्री भाड़े में बढ़ोतरी न होने से होने वाली हानि की भरपाई होती रही है.
– टैरिफ नीति में तर्कसंगत दृष्टिकोण का अभाव है. प्रति यात्री प्रतिकिमी हानि 10 पैसे प्रति किमी (2000-01) से बढ़ कर 23 पैसे/ किमी प्रति यात्री हानि(2012-13) हो गयी है
– 2013-14 में रेलवे का सामाजिक दायित्व ₹ 20,000 करोड़ था
– हालिया वृद्धि के ज़रिये 8000 कोर्ड रूपए की अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद

अब तक हुए निवेश का उपयोग :
– अतीत में परियोजनाओं को पूरा करने से अधिक उन्हें मजूरी देने पर जोर दिया गया.
– पिछले 30 वर्षों में 676 परियोजनाओं, जिनकी लागत 1,57,883 करोड़ थी, को शुरू करने की घोषणा की गयी
– तीस साल से अधिक पुरानी हैं 4 परियोजनाएं जिन्हें अभी पूरा होने का इंतज़ार है.
– फ़िलहाल सभी अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए चाहिए 5 लाख करोड़

रेलवे में एफडीआई और पीपीपी :
– वित्तीय पोषण प्राप्त करने के लिए पीएसयू, निजी निवेश, पीपीपी और एफडीआई जैसे विकल्पों में संभावनाएं तलाशी जाएँगी.
– आपरेशन में छोड़कर, रेलवे परियोजनाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
– दस बड़े स्टेशनों को अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डों की तर्ज पर विकसित किया जायेगा.
– पीपीपी मॉडल की तर्ज पर फ्रेट पार्क , लोगिस्टिक पार्क आदि बनाने की योजना

बजट के अनुमान :
– ,64,374 करोड़ रुपए के राजस्व
– 1,49,176 करोड़ का व्यय
– माल भाड़े में 4.9% की वृद्धि
– 30,100 करोड़ की वार्षिक योजना के लिए सकल बजटीय समर्थन

यात्रियों के लिए सेवा :
– भोजन की गुणवत्ता पर आईवीआरएस के माध्यम से फीडबैक सेवा का शुभारंभ. खाद्य एसएमएस और फोन पर आदेश दिया जा सकता है.
– व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए चुनिंदा ट्रेनों में कार्य स्टेशनों की पायलट परियोजना
– स्टेशनों की सफाई की निगरानी के लिए सीसीटीवी
– स्टेशनों पर खाद्य अदालत स्थापित की जाएगी
– स्टेशनों और ट्रेनों के लिए आरओ के पीने के पानी की सुविधा
– सभी प्रमुख स्टेशनों पर आराम से किसी भी मंच तक पहुँचने के लिए अलग विकलांग और वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए बैटरी चालित गाड़ियां

सुरक्षा :
-स्वचालित दरवाज़ों के लिए पायलट प्रोजेक्ट
-अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं को नज़र में रखते हुए 4000 महिला आर पी ऍफ़ कर्मियों की भर्ती
-ट्रेन में चलने वाले आरपीएफ कर्मियों को मोबाइल फोन दिए जायेंगे

आईटी पहल :
-5 साल में paperless कार्यालय.
-रीयलटाइम सभी ट्रेनों की ट्रैकिंग और रोलिंग स्टॉक
-मोबाइल आधारित गंतव्य सतर्क और जागने कॉल प्रणाली
-स्टेशनों पर डिजिटल आरक्षण चार्ट
-विभिन्न ई वाणिज्य सेवाओं के लिए रसद समर्थन का विस्तार
-जीआईएस मैपिंग के साथ रेलवे की भूमि संपत्ति अंकीयकरण

ई टिकटिंग :
-अगली पीढ़ी ई टिकटिंग प्रणाली में आरक्षण प्रणाली में सुधार.
-2000 टिकट्स प्रति मिनट से बढ़ा कर 7200 टिकेट प्रति मिनट का लक्ष्य
-विशेष ई टिकटिंग प्रणाली, 1.2 लाख उपयोगकर्ताओं एक साथ प्रवेश कर सकते हैं
-ऑनलाइन प्लेटफार्म टिकेट सिस्टम
-पार्किंग सह प्लेटफॉर्म टिकट उपलब्ध होने के लिए
-मुंबई अहमदाबाद सेक्टर पर बुलेट ट्रेनों
-औद्योगिक गलियारों में उच्च गति परियोजना. प्रमुख महानगरों एवं विकास केंद्रों को जोड़ने के लिए हाई स्पीड ट्रेनों के डायमंड चतुर्भुज नेटवर्क की स्थापना

कर्मचारी हित :
– कर्मचारी हितकारी कोष के लिए अंशदान 500 से बढ़ाकर 800 रुपये
– मेधावी बच्चों के लिए विशेष योजना.
-तकनीकी और गैर तकनीकी विषयों दोनों के लिए रेलवे विश्वविद्यालय
-इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट स्टडीज के तहत स्नातकों के लिए समर इंटर्नशिप.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.