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हज़ार-हज़ार करोड़ ले कर दिखायेंगे अपराधियों को बाहर का रास्ता..

By   /  July 10, 2014  /  No Comments

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विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त ख़बरों के अनुसार धोखाधड़ी और दुर्व्यवहारों की सज़ा काट रहे आसाराम और सहारा श्री सुब्रत रॉय,  दोनों की ताकतवर राजनेताओं के साथ गुप्त समझौते करने के लिए बातचीत चल रही है.10507150_512949662170686_6863036774406488179_o

आसाराम और सुब्रत रॉय, जो कि एक लम्बे समय से जेल की हवा खा रहे हैं, ने बचने के लिए भारत से बाहर जाने का रास्ता खोजने में पूरी ताकत झोंक दी है.

इसके लिए वे कानूनी सलाहकारों, बिचौलियों और लौबिस्टों के संपर्क में हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार सुब्रत रॉय के पुत्र सुशांत रॉय और पत्नी स्वप्ना रॉय इस मामले को देख रहे हैं और कई देशों के साथ बातचीत की प्रक्रिया में है जहां उन्हें शरण मिल सके.

वहीं आसाराम से उनके करीबियों के माध्यम से बातचीत चल रही है और वे पश्चिम में किसी देश में शरण ले सकते हैं. इसके लिए दोनों से एक-एक हज़ार करोड़ और संपत्ति की मांग रखी गयी है जिसे पूरा करने के बाद उन्हें देश से बाहर जाने में ढील बरतते हुए अघोषित रूप से बन्धनों से मुक्त कर दिया जायेगा.

गौरतलब है कि आसाराम पर नाबालिग के साथ यौन दुर्व्यवहार का आरोप है और सुब्रत रॉय “सहारा” धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप के चलते एक लम्बे समय से जेल में बंद हैं और तमाम कोशिशों के बावजूद बाहर आने में असफल रहे हैं.

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  • Published: 4 years ago on July 10, 2014
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  • Last Modified: July 10, 2014 @ 9:11 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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