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इशरत जहां मुठभेड़ के आरोपी पुलिस कर्मियों की पुनर्नियुक्ति..

By   /  July 13, 2014  /  No Comments

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राज्य रिज़र्व पुलिस के कमांडो अनाजू चौधरी जिन्हें सीबीआई जाँच के बाद इशरत जहां के फर्जी एनकाउंटर केस में दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया था, की नियुक्ति फिर से बहाल कर दी गयी है. उन्हें गोधरा के एसआरपी कैंप में नियुक्त किया गया है. गुजरात के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस ने कल एक बातचीत में प्रेस को बताया कि अनाजू चौधरी को फिर से नियुक्त कर लिया गया है.Pc0051900

सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट में चौधरी को पांच पुलिसकर्मियों की उस टीम का हिस्सा पाया गया था जिसने इशरत और तीन अन्य लोगों को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया था और इस घटना को एनकाउंटर का नाम दे दिया था. चौधरी ने अपनी सर्विस स्टेन गन से दस राउंड फायर किये थे और उन्हें 27 फरवरी 2013 को गिरफ्तर किया गया था. इसके बाद जब सीबीआई द्वारा तय किये गये 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की गयी तब उन्हें सीबीआई की विशेष अदालत ने 29 मई 2013 को जमानत दे दी थी. गौरतलब है कि इशरत जहां और सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में घटित हुए थे और प्रधानमंत्री बनने के बाद इन मामलों में अभियुक्तों को राहत मिलने की सम्भावना व्यक्त की जा रही थी.

चौधरी की बहाली इस मामले के एक और अभियुक्त और आईपीएस अधिकारी जीएल सिंघल की पुनर्नियुक्ति के बाद होने वाली दूसरी बहाली है. इसके साथ ही राज्य सरकार सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले में अभियुक्त आईपीएस अधिकारी अभय चुडास्मा की भी बहाली पर विचार कर रही है .

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  • Published: 3 years ago on July 13, 2014
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  • Last Modified: July 13, 2014 @ 2:26 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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