/नरेन्द्र मोदी के इस्तक़बाल को तैयार हूँ: हाफिज़ सईद..

नरेन्द्र मोदी के इस्तक़बाल को तैयार हूँ: हाफिज़ सईद..

मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता और भारत में मोस्ट वांटेड की लिस्ट में शामिल आतंकी हाफ़िज़ सईद को खोजने में एजेंसियां नाकाम रही हैं लेकिन वरिष्ठ भारतीय पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने न सिर्फ हाफिज को खोज निकला बल्कि उनसे लम्बी बातचीत भी की. सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी तसवीर से देख कर बातचीत का और उसकी विषय वस्तु का सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है. वैदिक कुछ समय पूर्व पाकिस्तान की यात्रा पर थे जहां उन्होंने लाहौर में हाफ़िज़ से मुलाकात की.

मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बात करते हुए सईद ने  कहा कि अगर मोदी पाकिस्तान आते हैं तो वो उनका इस्तकबाल करने को तैयार है. सईद ने अनौपचारिक होते हुए जसोदा बेन के बारे में भी बात की और पूछा कि मोदी की पत्नी के क्या हाल हैं ? 13-vedpratapvaidikandhafizsaeedmeeting

वैदिक के साथ हुयी बातचीत में सईद ने भारतीय मीडिया के ऊपर खुद को आतंकी घोषित करने का आरोप लगाते  हुए कहा कि भारत के मीडिया ने उसे विश्व समुदाय में आतंकी के रूप कुख्यात कर दिया है. वैदिक के अनुसार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से अधिक कड़ी सुरक्षा के बीच रहने वाला सईद पाकिस्तान में बेख़ौफ़ घूमता है और जहां चाहे वहाँ आ जा सकता है और सभाओं को सम्बोधित कर सकता है. उसके ऊपर किसी भी तरह की रोक टोक नहीं है.

पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में आतंकी ट्रेनिंग शिविर चलाने के आरोप का जवाब देते हुए सईद ने कहा कि पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत उसे इस मामले में दोषमुक्त करार कर चुकी है और खुदा का वास्ता देते हुए सईद ने खुद को बेक़सूर बताया. खुद को भारत से जुड़ा हुआ बताते हुए सईद ने बताया की उसका रोपड़ से पुराना नाता है और उसकी माँ यही पर गर्भवती हुयीं थी. हालाँकि उसका जन्म मार्च 1948 में पाकिस्तान में हुआ. सईद ने भारत और पाकिस्तान की संस्कृति को आपस में जुड़ा हुआ बताया और कहा कि अगर मौका दिया जाये तो वो भारत के किसी भी शहर में लोगों के बीच जा कर अपनी बात रख सकता है और लोगों को बता सकता है कि उसे गलत समझा गया है. अगर मौका दिया जाये तो वो ग़लतफ़हमियाँ दूर कर सकता है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.