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हाफिज सईद और वेद प्रताप वैदिक की मुलाकात को लेकर लोकसभा में हंगामा..

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मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद और बाबा रामदेव के करीबी वेद प्रताप वैदिक की मुलाकात को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. विपक्षी दलों ने इस मसले पर संसद में आज जमकर हंगामा किया और केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की. विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही बाधित हुई है.13-vedpratapvaidikandhafizsaeedmeeting

राज्‍यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो कांग्रेस के सांसदों ने सईद-वैदिक मुलाकात के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया. कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने सदन में यह मसला उठाया. इसके बाद सत्‍यव्रत चतुर्वेदी और आनंद शर्मा भी अपनी सीट पर खड़े हो गए और केंद्र सरकार से इस मसले पर जवाब मांगा. कांग्रेसी नेताओं ने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया. आनंद शर्मा ने वैदिक की गिरफ्तारी की मांग भी की.

ved-pratap-vaidik-with-ramdevकेंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने बयान दिया कि हाफिज सईद एक आतंकवादी है और वह भारत पर हमले का आरोपी है. केंद्र सरकार का हाफिज-वैदिक मुलाकात से कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि जेटली के जवाब से कांग्रेस के सदस्‍य संतुष्‍ट नहीं हुए और फिर से हंगामा शुरू कर दिया. कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस ने सरकार को बिना नोटिस दिए राज्‍यसभा को बाधित किया है. इससे कांग्रेस की गंभीरता का अंदाजा लगता है.

जावड़ेकर ने कहा, ‘चूंकि अरुण जेटली ने सरकार की तरफ से सदन में बयान दे दिया है, इसलिए कांग्रेस को इस मसले पर शांत हो जाना चाहिए. कांग्रेस आतंकवाद के मसले का राजनीतिकरण कर रही है. जब गिलानी हाफिज सईद से मिले थे तो उस वक्‍त केंद्र की यूपीए सरकार ने क्‍या किया था, इसका उन्‍हें जवाब देना चाहिए.’

मुंबई हमले के आरोपी हाफिज सईद से पाकिस्तान जाकर मुलाकात करके वरिष्ठ भारतीय पत्रकार वेद प्रताप वैदिक उस वक्‍त घिर गए जब हाफिज सईद के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें सामने आईं. मामले पर बवाल बढ़ा तो वैदिक ने सफाई पेश करते हुए कहा कि वो बतौर पत्रकार सईद से मिले हैं. वहीं, वैदिक के बचाव में उतरे रामदेव ने कहा है कि वैदिक पत्रकार हैं और इस नाते किसी से भी मिल सकते हैं.

 

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. सरकार के द्वारा बयान देने के बाद भी इस प्रकार सदन को न चलने देना कांग्रेस की बोखलाहट को ज़ाहिर करता है। करे भी क्या ?पर देश का पैसा बर्बाद करना ये दल अपना पैत्रिक अधिकार समझते हैं अब बेचारे सड़कों पर आ गए हैं तो जनता को अस्तित्व दिखाने हेतु कुछ तो चाहिए?

  2. सरकार के द्वारा बयान देने के बाद भी इस प्रकार सदन को न चलने देना कांग्रेस की बोखलाहट को ज़ाहिर करता है। करे भी क्या ?पर देश का पैसा बर्बाद करना ये दल अपना पैत्रिक अधिकार समझते हैं अब बेचारे सड़कों पर आ गए हैं तो जनता को अस्तित्व दिखाने हेतु कुछ तो चाहिए?

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