/एस्सार प्रस्तावित खदान के खिलाफ विरोध को दबाने के लिए प्रयासरत..

एस्सार प्रस्तावित खदान के खिलाफ विरोध को दबाने के लिए प्रयासरत..

मुंबई, ग्रीनपीस के 30 सेकेंड के विडियो जिसे फन सिनेमा घरों में दिखाया जा रहा है पर एस्सार ने आपत्ति जतायी है. इस विडियो में महान जंगल को बचाने की बात दिखायी गयी है. महान में प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में उठ रहे किसी भी तरह की आवाज को दबाने के लिए एस्सार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है. protest

ग्रीनपीस की कैंपेनर अरुंधती मुत्थु ने कहा कि, “एस्सार को प्रस्तावित कोयला खदान के खिलाफ बढ़ रहे आंदोलन को दबाने के लिए एस्सार ने अप्रासंगिक हलफनामा दायर किया है. इसके माध्यम से वो प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध को दबाने का प्रयास कर रहा है. हमने खदान की वजह से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और जंगल पर निर्भर लोगों के अधिकारों के मुद्दे को उठाया है”.
विडियो में उठाये गए सवाल किसी भी अदालत के दिशा-निर्देश को अनदेखा नहीं करता. इस साल के शुरुआत में जनवरी में ही एस्सार समूह ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर करके एनजीओ पर अपने खिलाफ बोलने और आलोचना करने पर पांबदी की मांग की थी. 22 जनवरी को एस्सार के मुंबई स्थित मुख्यालय पर महान जंगल में होने वाले विनाश के खिलाफ प्रदर्शन के बाद एस्सार ने ग्रीनपीस पर 500 करोड़ की मानहानि और चुप रहने के आदेश का मुकदमा दायर किया था.

यू-ट्यूब विडियो में एस्सार के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के खिलाफ करीब सौ शहरों में आयोजित प्रदर्शन को दिखाया गया है. एस्सार ने लीक आईबी रिपोर्ट को भी मानहानि के मुकदमे में लाने का प्रयास किया था. न्यायालय ने इस रिपोर्ट की संबंधित केस में प्रासंगिकता पर प्रश्न उठाया था.

मुत्थु ने कहा कि, “इस तरह लोकतंत्र में आलोचना को दबाने का प्रयास अस्वाकार्य है. इस तरह एस्सार असल मुद्दे से लोगों का ध्यान बांटना चाह रहा है”.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.