/वैदिकी गप, गप न भवति…

वैदिकी गप, गप न भवति…

वेद प्रताप वैदिक को जो लोग अर्से से जानते हैं कि वे न केवल रीढ़विहीन हैं बल्कि तर्क विहीन भी हैं…वैदिक साहब का प्रिय शगल है अपने बारे में ख़ुद ही बढ़ा चढ़ा कर बताना…एक दौर था, जब वैदिक साहब मालिक के चापलूस सम्पादक हुआ करते थे…उस वक़्त स्वयं ही ये कई बार बिन बुलाए सरकारी दावतों-पार्टियों में पहुंच जाते थे…बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचाते थे…बाबाओं के पास अक्सर आशीर्वाद लेने के बहाने, वहां आने वाले नेताओं-उद्योगपतियों से सोशल नेटवर्किंग करते रहते थे…ख़ुद को वैदिक देश का ही नहीं दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा विदेश-अंतर्राष्ट्रीय मामलों का विशेषज्ञ बताते हैं…ख़ुद ही कह देते हैं कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से vaidik_350_071514112657उनके निजी सम्बंध थे…जिसको लेकर वरिष्ठ कांग्रेसी घर में बैठ कर ख़ूब हंसते हैं…पी वी नरसिम्हाराव के वक़्त में उनको डिप्टी पीएम कहा जाता था…इसका सपना भी सिर्फ उन्हीं को आया था…क्योंकि इस बारे में जो लोग ऐसा कहते थे, उनको भी कुछ नहीं पता था…यही नहीं अटल बिहारी वाजपेयी ने पोकरण का परीक्षण भी उनसे पूछ कर ही किया था…ऐसा उन्होंने एक बार अटल जी के सबसे करीबी पत्रकार आलोक तोमर से ख़ुद ही कह दिया…बाद में आलोक तोमर इस वैदिक जी को अपने ही अंदाज़ में गरियातो हुए ख़ूब हंसे…अर्जुन सिंह के सामने वेद प्रताप वैदिक का नाम लेने पर एक मंझोले पत्रकार से उन्होंने कहा कि किसके चक्कर में पड़े हो…लेकिन वैदिक जी अब रामदेव के सियासी गुरु (समझ जाइए कि उनकी सियासी समझ कैसी है…) और सरकार के स्वघोषित प्रवक्ता है…पाकिस्तान में उन्होंने वही खेल खेला, जो वो सालों से यहां खेलते आए…वहां के लोग नए थे, समझ न सके…वैदिक जी ने कहा कि वो मोदी के बेहद करीबी हैं…उनके तो नाम में भी वैदिक लगा है…यही नहीं वो सरकार की ओर से आए हैं…पत्रकार साथियों को लगा कि यार ये बड़ा आदमी है…सो हाफ़िज़ सईद से मुलाक़ात का प्रस्ताव रख दिया (हो सकता है कि शरारतन मौज लेने के लिए ऐसा किया हो)…वैदिक जी फंस गए…तो जा कर सईद से मिल भी लिए…बिना धोती गीली किए वहां से निकल आए तो लगे शेखी बघारने उस कर्मचारी की तरह से जो बॉस के केबिन से टर्मिनेशन की जगह सिर्फ गाली खा कर निकलता है और कहता है, “आज ठीक कर दिया साले को…खूब गरियाया…” उस में वैदिक जी दोबारा फंस गए…और फोटो वोटो जारी कर दी…पाक में टीवी पर इंटरव्यू के लिए गए तो सोचा कि मेहमाननवाज़ी के लिए नवाज़ी सलीका तो अपनाना होगा…सो बौद्धिक (जो वो दरअसल बहुत बड़े वाले हैं) दिखने के चक्कर में अरुंधति, गीलानी और प्रशांत भूषण की नकल कर डाली…लेकिन साहब नकल में असल की बात कहा…सो और बुरे फंसे…बस अब दुआ कर रहे होंगे कि वो तो कोई रेकॉर्डर बिना साथ लिए हाफ़िज़ का इंटरव्यू करने चले गए थे…लेकिन कहीं सईद ने उनकी बातचीत की रेकॉर्डिंग न कर ली हो…अगर वो भी जारी कर दी तो क्या होगा….ज़ाहिर है बड़बोले वैदिक का फिर तो सईद ही हाफ़िज़ होगा…वैदिक जी वैसे इन सब के अभ्यस्त हैं…इतनी बड़ी बेइज़्ज़ती कभी नहीं हुई लेकिन छोटी बड़ी तो ऐसी पोल उनकी ज़िंदगी भर खुलती रही है…
(ग़ालिब ज्ञान की फेसबुक वाल से) 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.