/विवादित वैदिक ..

विवादित वैदिक ..

वेद प्रताप वैदिक हाफ़िज़ सईद से मुलकात कर के लौट चुके हैं. खबर है कि पाकिस्तान प्रवास के दौरान उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और अन्य कई पाकिस्तानी नेताओं से भी मुलाकात की है. इस प्रवास को ले कर कई सवाल उठे हैं. सबसे बड़ा सवाल भारतीय उच्चायोग ने ये कह कर खड़ा कर दिया है कि उसे वैदिक की इन मुलाकातों की जानकारी नहीं थी. ऐसे में भारत के एक पत्रकार का एक आम इन्सान की तरह पाकिस्तानी राजनयिकों से मिलना और उसके बाद भारत में मोस्ट वांटेड घोषित आतंकवादी से मिल कर आने के बाद सरकार और उच्चायोग को सूचित न करना अपने आप में एक गंभीर और गैर ज़िम्मेदार कृत्य है. अगर वैदिक के कहे को सच भी मान लें कि वो एक पत्रकार की तरह से मिले इन सभी से तो भी ये सवाल उठता है कि उन्होंने बतौर पत्रकार अपनी रिपोर्ट देश के सामने  क्यों नहीं रखी. क्या खबरें और तथ्य जान कर उन्हें दबा जाना ही पत्रकारिता है ? ऐसे में उन्होंने न सिर्फ देश के साथ बल्कि अपने पेशे के साथ भी लापरवाही से बर्ताव किया है.vaidik_350_071514112657

सूचनाओं के अनुसार वैदिक मणिशंकर अय्यर आदि नेताओं के साथ एक शिष्ट मंडल के साथ पाकिस्तान गए थे लेकिन वो शिष्ट मंडल सिर्फ तीन दिन में वापस आ गया और वैदिक उसके बाद दो हफ्ते पाकिस्तान में रुके रहे. वहाँ वैदिक भारतीय उच्चायोग के द्वारा प्रबंधित स्थलों पर रुके और उनकी मेहमाननवाज़ी में रहे. ऐसे में अगर उच्चायोग ने वैदिक की सूचना न होने की बात कही है तो वैदिक पर गंभीर लापरवाही का आरोप बनता है. उनके पूर्व के रिकॉर्ड को देखते हुए उनसे ऐसी लापरवाही न करने की अपेक्षा स्वाभाविक है. साथ ही साथ उन्हें ये भी स्पष्ट करना चाहिए था कि उन्हें दो हफ्ते रुकने के लिए वीसा और खर्च किसने वहन किया. अगर निजी खर्च पर थे तो उच्चायोग में कैसे रुके थे और अगर उच्चायोग के खर्च पर थे तो जवाबदेही से कैसे इंकार कर सकते हैं. साथ ही साथ सरकार को भी इस बाबत जवाब देना चाहिए.13-vedpratapvaidikandhafizsaeedmeeting

इसके अलावा भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी से मिलने के बाद उसे निजी या अनाधिकारिक मुलाकात करार देना अपने आप में हास्यास्पद तो है ही साथ ही राष्ट्र विरोधी भी. जिस आधार पर सोनी सोरी और हेम मिश्र को हवालात में बंद किया जा सकता है, ठीक उसी आधार पर वैदिक के विरुद्ध गैर ज़मानती कृत्य के अंतर्गत मुकदमा दर्ज होना चाहिए था. वैदिक जब कहते हैं कि वे किसी देश के प्रतिनिधि बन कर नहीं गए थे तो उन्हें ये बात ज़रूरी तौर पर समझनी चाहिए थी  कि वे  भारतीय शिष्टमंडल के साथ गए थे, वे  प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में सम्मानित पदों को सुशोभित कर चुके हैं और प्रमुख राजनीतिज्ञों के साथ अत्यंत मधुर सम्बन्ध रखते हैं. ऐसे में वे अगर किसी आतंकी से मिलते हैं, डौन न्यूज़ को इंटरव्यू देते हैं या किसी राजनीतिज्ञ से मुलाकात करते हैं तो निश्चय ही ये मुलाकात आधिकारिक और औपचारिक होगी ही और उन्हें इसकी सूचना एजेंसियों के अलावा सरकार को देनी ही होगी. ऐसा कर के उन्होंने सरकार की अवमानना की है और एक नागरिक के तौर पर अपने फ़र्ज़ के निर्वहन में चूक की है जिसके लिए उन्हें दोषी करार दिया जाना चाहिए. लोकसभा में सरकार सफाई देते हुए कह चुकी है कि वैदिक की मुलाकात निजीऔर व्यक्तिगत थी. ऐसे में उन पर निजी तौर पर एक आतंकी से मिलने के लिए मुकदमा क्यों नहीं चलाया जा रहा है इस बात के लिए भी सरकार को सफाई देनी चाहिए. खास तौर से जब किसी नक्सली से सिर्फ मेल मिलाप को राष्ट्र विरोधी गतिविधि करार दिया जा सकता है वहाँ वैदिक का कृत्य प्रश्नवाचक है.

विदेश मंत्रालय देख रही सुषमा स्वराज ने कहा कि वो पूरी ज़िम्मेदारी के साथ स्पष्ट करती हैं कि सईद-वैदिक की मुलाकात का सरकार से कोई लेना देना नहीं है. ये मुलाकात शुद्ध रूप से निजी और व्यक्तिगत है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी लगभग यही शब्द दोहराये. उन्होंने कहा कि  यह एक निजी व्यक्ति का राजनयिक दुस्साहस है. सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि क्या वैदिक पाकिस्तान गए एक प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल के सदस्य 13 जून को जाने के बाद 15 जून को आ गए लेकिन वैदिक वहां 15 दिन तक रूके रहे. उन्हें इतनी लंबी अवधि का वीजा कैसे मिला. उन्होंने कहा कि वैदिक ने वहां जो कुछ कहा और जिन लोगों से मुलाकात की उसके बारे में भारतीय उच्चायुक्त ने क्या भारत सरकार को सतर्क किया या कोई रिपोर्ट भेजी. पूरे घटनाक्रम के दौरान हमारी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं. कांग्रेस के सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मुद्दा है और सरकार को बताना चाहिए कि उसने क्या कार्रवाई की है. उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब बेहद जरूरी है कि आखिर वैदिक ने किसकी अनुमति से सईद से मुलाकात की.पार्टी के कई अन्य सदस्यों के साथ ही सपा, बसपा, जदयू, तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने उनकी बात का समर्थन किया. जदयू नेता शरद यादव ने इस मामले में सरकार की ओर से सफाई दिये जाने की मांग पर बल देते हुए कहा कि इससे लोगों के मन में जो शंकाएं हैं, वह दूर हो जाएंगी. कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब पाकिस्तान में यासीन मलिक हाफिज सईद से मिलने गए थे तो उस समय भाजपा ने मलिक की गिरफ्तारी की जोरदार मांग की थी. उन्होंने सवाल किया कि क्या भाजपा आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रूख से पीछे हट रही है.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.