/सुलझी नहीं अग्निवेश के वीडियो की गुत्थी, किसने खींचा, किसने ठुकराया और किसने अपलोड किया?

सुलझी नहीं अग्निवेश के वीडियो की गुत्थी, किसने खींचा, किसने ठुकराया और किसने अपलोड किया?

यूट्यूब पर रिलीज हुए एक बहु चर्चित वीडियो ने अन्ना आंदोलन के दौरान ही स्वामी अग्निवेश की ‘असलियत’ खोल कर रख दी थी, लेकिन अभी तक यह सस्पेंस बरकरार है कि आखिर किस रिपोर्टर या कैमरामैन ने इतनी बड़ी खबर पर अपन नाम का बाई लाइन लेना तक ठीक नहीं समझा। इस वीडियो में अग्निवेश किसी ‘कपिल’ से महाराज कह कर बात करते हुए सुने गए थे और अन्ना को पागल हाथी की तरह जिद्दी बता गए थे। मीडिया ने स्वामी अग्निवेश के संबोधन को केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल बताया था।

स्वामी अग्निवेश: कैसी अग्नि, कैसा वेश?

सबसे पहले इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग यूट्यूब पर आई.. फिर जनतंत्र नाम की एक वेबसाईट के वॉटर मार्क के साथ वीडियो अपलोड हुआ और उसके कुछ ही देर बाद क्लीन वीडियो भी यूट्यूब पर आ गया। हालांकि वीडियो के आते ही वह करीब-करीब सभी चैनलों की सुर्खियों में आ गया, लेकिन इसे किसने जारी किया, यह अब तक आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया। जैसा कि वीडियो देखने से भी प्रतीत होता है, यह दो कैमरों की शूटिंग है और इसमें कुछ काट-छांट की गई है या कैमरा दो तीन बार चलाया गया है। कुछ चैनलों ने इस एडिटिंग का जिक्र तो किया, लेकिन वीडियो की विश्वसनीयता पर किसी ने कोई सवाल नहीं उठाया।

इधर तहलका ने अपने ताजा अंक में चौंकाने वाले तथ्यों को उठाया है। तहलका में प्रकाशित अतुल चौरसिया की रिपोर्ट के मुताबिक स्वामी अग्निवेश की इस बातचीत को दो चैनलों के कैमरा मैनों ने रिकॉर्ड किया था। तहलका के मुताबिक यह वीडियो उन संस्थानों के कैमरा मैनों ने ‘लीक’ कर यूट्यूब पर डलवाया था। रिपोर्ट के कुछ अंश इस प्रकार हैं :-

विवादप्रिय मीडिया को जैसे ही टीम के बीच दरार की खबर लगी, माइकधारी पत्रकारों का हुजूम स्वामी जी के घर की तरफ दौड़ पड़ा। स्वामी जी की इस नाराजगी में ही कुछ पत्रकारों ने उनके सरकारी सांठ-गांठ के तंतु सूंघ लिए थे। जिन परिस्थितियों में यह बहुचर्चित वीडियो तैयार हुआ वह काफी दिलचस्प है। तहलका ने वीडियो तैयार करने वाले पत्रकारों और इसे ब्लॉग और यूट्यूब पर डालने वालों से बातचीत करके उन स्थितियों को साफ करने का प्रयास किया है जिनमें यह बातचीत हो रही है और जिनसे बातचीत हो रही है।

26 अगस्त को स्वामी अग्निवेश द्वारा सार्वजनिक रूप से अन्ना और उनके सहयोगियों के खिलाफ नाराजगी जताने के बाद उनके आवास पर दो खबरिया चैनलों के पत्रकार पहुंचे। एक महिला रिपोर्टर थीं और दूसरे पुरुष। दोनों के ही कैमरामैन स्वामी जी को कुछ भिन्न-भिन्न मुद्राओं में अपने कैमरों में कैद कर रहे थे। स्वामी जी रिपोर्टरों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उनके सहयोगी, जो इस वीडियो में भी दिखाई पड़ते हैं, उनका फोन लेकर आते हैं और वहां मौजूद एक पत्रकार के मुताबिक कहते हैं, ‘स्वामी जी कपिल जी का फोन है।’ यह सुनकर स्वामी अग्निवेश उठ खड़े हुए। रिपोर्टर वहीं रुके रहे और दोनों के कैमरामैनों ने अपने कैमरे चालू रखे।

जनतंत्र: कैसे मिला वीडियो?

वहां मौजूद एक रिपोर्टर तहलका को बताते हैं, ”जैसे ही मैंने सुना कि कपिल जी का फोन है मुझे लग गया कि स्वामी जी की सरकार के साथ कुछ पक रही है।’ रिपोर्टरों के मुताबिक उस समय उन्हें यह स्पष्ट हो गया था कि यह कपिल जी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री कपिल सिब्बल ही हैं। उन लोगों ने सारी बातचीत रिकॉर्ड कर ली। इसके बाद दोनों रिपोर्टर वापस अपने दफ्तर पहुंचे। दिलचस्प बात है कि दोनों के ही न्यूज चैनलों ने यह वीडियो नहीं चलाया। एक रिपोर्टर कहते हैं, ‘मेरे चैनल ने इसे चलाने से इनकार कर दिया तो बात आई-गई हो गई। बाद में मुझे पता चला कि यह वीडियो इंडिया टीवी और एक वेबसाइट पर चल रहा है। मुझे लगा कि मेरे साथी रिपोर्टर या कैमरामैन ने इसे वेबसाइट वालों को दे दिया होगा।” इसके बाद यह यूट्यूब के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच चुका है।

अब सवाल यह है कि अगर तहलका की रिपोर्ट सही है तो कौन से दो चैनलों ने इस खबर को ठंढे बस्ते में डाल दिया..? क्या इसमें भी कोई बरखा दत्त ऐंगिल था और बाद में सफाई देते हुए चैनल के आउटपुट एडीटर (जिनके सर पर खबरों की वरीयता तय करने की जिम्मेदारी होती है) कह देंगे कि उन्हें यह कोई खास बड़ी खबर नहीं लगी..? क्या चैनल में मौजूद आउटपुट या इनपुट एडीटरों ने अपनी सतही समझ के कारण इसे अपने चैनल पर नहीं चलने दिया..? या फिर उनमें कपिल सिब्बल का सामना करने की हिम्मत नहीं थी..? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब ढूंढने पर कई चेहरों पर से पर्दे उठ सकते हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.