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एक आइसक्रीम नहीं खरीद पाए अजीत पवार, भेजा दो इंजीनियरों को नोटिस..

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april-14-21 (1)अपने अजब गजब बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एक बार फिर से सुर्ख़ियों में हैं. महाराष्ट्र के  पीडब्ल्यूडी के दो इंजिनियरों को लापरवाही के आरोप में नोटिस भेजा गया है. लापरवाही  भी सिर्फ इतनी कि उप-मुख्यमंत्री अजीत पंवार के दौरे पर उनके लंच में आइसक्रीम नहीं परोसी गयी.

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता अजीत पवार जालना जाते वक़्त औरंगाबाद के एक सरकारी विश्राम गृह में रुके थे. वो जालना अपने पार्टी की सभा  में सम्मिलित होने जा रहे थे. विश्राम के दौरान उन्होंने गेस्ट हाउस में लंच करने के बाद पवार ने अचानक डेजर्ट की मांग कर दी. स्टाफ ने जब ये खबर दी कि मीठे में तो कुछ नहीं तो पवार बिना कुछ बोले वहां से चले गए. बाद में समर्थकों के माध्यम से जिला कलेक्टर के पास लिखित शिकायत दर्ज करवाई और दो इंजिनियरों को इसके लिए ज़िम्मेदार  ठहराते हुए नोटिस भेजने का दबाव बनाते रहे.

गेस्ट हाउस के प्रबंधक एग्जीक्यूटिव इंजिनियर एमबी मोरे ने  कहा कि ऐसे मामलों में मेन्यु लायज़निंग ऑफिसर तय करते हैं और उन्हें इसके बारे में उन्हें कोई खबर नहीं है.  हालाँकि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के समर्थक इस स्पष्टीकरण  से ज़रा भी संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने पूरे स्टाफ को निलंबित करने की मांग करते हुए इसे अक्षम्य लापरवाही करार दिया. वही दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर इस मामले को ले कर पवार की खूब खिंचाई हो रही है. एक उपयोगकर्ता कहते है –“अभी कुछ समय पहले ही विधायकों की तनख्वाह और पेंशन दोनों बढाई गयी है ऐसे में एक आइसक्रीम को ले कर इतना बवाल किसलिए? क्या ये नेता लोग अपने पैसे से खरीद कर एक आइसक्रीम भी नहीं खा सकते? क्या जनता हर चीज़ का खर्च वहन करेगी?”

इस बाबत जब औरंगाबाद के कलेक्टर विक्रम कुमार से बात करने की कोशिश की गयी तो वे किसी कार्यक्रम में व्यस्त बताये गए.

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  1. आइसक्रीम के लिए भी पैसे नहीं जिनके पास , बेचारे इतने गरीब नेता इस देश को कब कहाँ मिलेंगे ?गर्व होना चाहिए हमें ऐसे धरती से जुड़े लोगों पर , बजाय इसके कि हम इनकी खिंचाई करें

  2. आइसक्रीम के लिए भी पैसे नहीं जिनके पास , बेचारे इतने गरीब नेता इस देश को कब कहाँ मिलेंगे ?गर्व होना चाहिए हमें ऐसे धरती से जुड़े लोगों पर , बजाय इसके कि हम इनकी खिंचाई करें

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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