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MH 17 विमान हादसे को लेकर एक दूसरे पर आरोप का खेल..

By   /  July 18, 2014  /  No Comments

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मलेशियाई विमान पर हमले को लेकर अमेरिका, रूस, मलेशिया और यूक्रेन में खासी हलचल है. घटना के बाद ओबामा ने मलेशिया और यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्षों से बात की. हमले को लेकर एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने का खेल शुरू हो गया है. यूक्रेन ने रूस समर्थित विद्रोहियों पर मिसाइल दागने का आरोप लगाया है तो रूस ने यूक्रेन की सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.Site of a Malaysia Airlines Boeing 777 plane crash is seen in the settlement of Grabovo in the Donetsk region

मलेशियाई विमान MH 17 पर मिसाइल किसने दागी, इस बात को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. यूक्रेन की सरकार का दावा है कि रूस के समर्थक विद्रोहियों ने बक मिसाइल से हमला किया. यूक्रेन के मुताबिक ये मिसाइल प्रणाली सिर्फ रूस के पास है और रूस सैनिक साजो-समान यूक्रेन के विद्रोहियों को दे रहा है. अपने दावे के समर्थन में यूक्रेन ने दो लोगों की बातचीत की रिकॉर्डिंग पेश की है. दावा किया जा रहा है कि ये बातचीत एक विद्रोही कमांडर और रशियन मिलिट्री एजेंसी के एक ऑफिसर के बीच की है.

दूसरी तरफ यूक्रेन के विद्रोही गुट ने इस घटना में अपना हाथ होने से इनकार किया है. विद्रोही गुट के नेता अलेक्जेंडर बोरडोई ने कहा है कि उनके पास ऐसे हथियार हैं ही नहीं जो इस तरह के हमले को अंजाम दे सकें.
हालांकि विद्रोहियों का समर्थन करने वाली एक वेबसाइट पर दावा किया गया है कि बागियों ने मलेशियाई विमान को यूक्रेन की सेना का विमान समझकर हमला किया था. यानी इस साइट के मुताबिक ये हमला रूस समर्थित विद्रोहियों ने ही किया है, लेकिन अनजाने में उन्होंने यात्री विमान को निशाना बना दिया.

बहरहाल ये अब तक साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि मलेशियाई विमान MH17 में सवार 298 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है. इस हादसे के बाद दुनिया भर के एयरलाइंस ने अपने उन विमानों का रास्ता बदलने का फैसला किया है जो इस इलाके के ऊपर से गुजरते हैं. एयर इंडिया, ब्रिटिश एयरलाइंस, जर्मन एयरलाइंस लुफ्तहांसा, रूसी एयरलाइंस ट्रांस एयरो समेत तमाम एयरलाइंस ने यूक्रेन के वायुक्षेत्र के ऊपर से अपने विमान न उड़ाने का फैसला किया है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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