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हजारों करोड़ के घोटाले में तीन निवेशकों की मौत के बाद जागी पुलिस..

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पश्चिम बंगाल के शारदा फण्ड घोटाले को लोग भूले नहीं थे कि एक और घोटाला सामने आया है. महाराष्ट्र में सामने आये केबीसी घोटाले में लोगों को महज 30 महीने में रकम दोगुनी करने का लालच देकर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है. सिर्फ ढाई साल में पैसा दुगना करने का लालच दे कर पैसा तो जमा करवा लिया और जब वापस लौटने का समय आया तो संचालक पैसे ले कर  चम्पत हो गया. निवेशकों को ये सुन कर भारी सदमा लगा और तीन निवेशक अपनी मेहनत का पैसा डूबने के सदमे को बर्दाश्त  नहीं कर पाए और उनकी मृत्यु हो गयी.

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आश्चर्यजनक रूप से महाराष्ट्र सरकार ने अब तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की है और इस मामले को अन्य किसी हलके फुल्के मामले की तरह से ले रही थी. भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने गुरुवार को संसद में उठाकर तवज्जो दे दिया है.

हजारों करोड़ लूट कर भागने के इस मामले का मुख्य भाऊसाहब चव्हाण जो हर इन्सान को अमीर बनाने के सपने दिखाता रहता था. इसके लिए मोदी और ओबामा जैसी शख्सियतों के भाषण कॉपी करता करता था और उन्हें दोहरा कर लोगों को फांसता था. आरोपी अब सिंगापुर की तरफ रवाना हो चुका है. कॉमर्स स्नातक भाऊसाहब पहले नासिक में एक स्टोर कीपर था. अपने पांच हज़ार रूपए किसी कंपनी में गंवाने के बाद उसे यही से तरीका मिला और उसने लोगों को बेवकूफ बनाने का धंधा शुरू कर लिया. साल 2009 में डीबीसी मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी प्रा. लि. के नाम से उसने तीन महीने में खूब पैसा कमाया. उसके बाद केबीसी मल्टीट्रेड प्रा. लि. के नाम से कंपनी शुरू की जिसने महारष्ट्र, गुजरात, कर्णाटक और मध्य प्रदेश में लोगों को ठगना जारी रखा.

बढती आमदनी के साथ चव्हाण ने कंपनी का विस्तार भी किया. वो इसके बाद होटल और रियल एस्टेट के धंधे में भी उतरा. इसके अलावा तीसरी जमात पास पानी पत्नी और बेटे को भी कंपनी का डायरेक्टर बना डाला. मामले को ले कर पिछली फरवरी में सीआईडी ने एक रिपोर्ट दी थी जिस पर कोई काम नहीं हुआ था  लेकिन तीन निवेशकों के मौत को गले लगाने के बाद पुलिस हरकत में आई है और इस मामले की जांच कर रही है.

 

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