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विजय माल्या है इस देश का सबसे बड़ा डिफाल्टर..

By   /  July 19, 2014  /  3 Comments

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देश में ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं है, जिनके सिर पर करोड़ों का कर्ज है। ऐसा ही एक नाम है शराब के कारोबारी विजय माल्या। जी हां, विजय मालया की कंपनी किंग फिशर एयरलाइंस करीब पिछले एक साल से बंद है और इस पर बैंकों का इतना कर्ज चढ़ चुका है कि माल्या ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, किंगफिशर पर कुल 4,022 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिनमें ज्यादातर बैंक सरकारी हैं।timthumb

वित्त मंत्रालय को भेजे गए अपने आंकड़े में बैकों ने देश के 50 कर्जदारों पर दिसंबर 2013 तक बैंकों का 53,000 करोड़ रुपया फंसा होने की जानकारी दी है। विजय माल्या के अलावा विनसम डायमंड(सुराज डायमंड)पर 3,243 करोड़ रुपए, इलेक्ट्रोथर्न इंडिया पर 2,653 करोड़ रुपए, कॉर्पोरेट पॉवर पर 2,487 करोड़ रुपए, स्टर्लिंग बायोटेक पर 2,031 करोड़ रुपए, फोरएवर प्रेसस पर 1,754 करोड़ रुपए, केएस ऑयल पर करीब 1,705 करोड़ रुपए और जूम डेवलपर्स पर 1,419 करोड़ रुपए का कर्ज है।

कानून में कुछ कमियों के चलते इन बड़े कर्जदारों से पैसे वसूलना मुश्किल हो रहा है और ऐसे में बैंकों तथा वित्त मंत्रालय पर सरकार का दबाव बढ़ता जा रहा है। हालांकि इतने कर्जे के बावजूद इनकी रईसी और ऐशो-आराम में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आई है।

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  • Published: 3 years ago on July 19, 2014
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  • Last Modified: July 19, 2014 @ 1:08 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    lagata hai kuch too hoga

  2. “ज़िन्दगी मिलेगी फिर न दोबारा ” ये ही मज़ा है इस देश में जीने का ,कर्ज लेकर मलाई खाओ ,फन्टियों के साथ मजे उड़ाओ , इस देश के लचर कानून इन लोगों को ही ऐश करने की छूट देते हैं आम आदमी सरकारी राष्ट्रीकृत बैंक से लोन आसानी से ले नहीं सकता , रिश्वत देकर लेने पर अगर समय पर चुका न पाये तो उसका सब कुछ बेच सड़क पर खड़ा कर दिया जाता है , पर इनका कुछ नहीं बिगड़ता

  3. "ज़िन्दगी मिलेगी फिर न दोबारा " ये ही मज़ा है इस देश में जीने का ,कर्ज लेकर मलाई खाओ ,फन्टियों के साथ मजे उड़ाओ , इस देश के लचर कानून इन लोगों को ही ऐश करने की छूट देते हैं आम आदमी सरकारी राष्ट्रीकृत बैंक से लोन आसानी से ले नहीं सकता , रिश्वत देकर लेने पर अगर समय पर चुका न पाये तो उसका सब कुछ बेच सड़क पर खड़ा कर दिया जाता है , पर इनका कुछ नहीं बिगड़ता

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