/बदायूं कांड में कब्रों के पास बना घेरा भी गंगा में डूबा..

बदायूं कांड में कब्रों के पास बना घेरा भी गंगा में डूबा..

बदायूं। कटरा सआदतगंज में किशोरियों की कब्रों के पास बनी बाउंड्री गंगा में समा गई है। जलस्तर को देखकर दोबारा पोस्टमार्टम करा पाना अब नामुमकिन है। कब्रों को बचाने के जिम्मेदार यूपी ब्रिज कॉर्पोरेशन के इंजीनियर तीसरे दिन घाट पर नहीं पहुंचे, इससे व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।23_07_2014-23graveBada1

किशोरियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खामियां मिलने पर सीबीआइ ने शवों को निकलवाकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए एक्सपर्ट से राय ली थी। एम्स के मेडिकल बोर्ड से सहमति मिलने के बाद बीते शनिवार को सीबीआइ मेडिकल बोर्ड के साथ अटैना घाट पर पहुंची थी। बाढ़ खंड विभाग के इंजीनियर अपने कर्मचारियों के साथ कब्रों को बचाने में जुट गए। लेकिन देखते-देखते गंगा ने कब्रों को अपने आगोश में ले लिया। कब्रों के ऊपर से करीब चार फिट ऊंचा पानी बहने लगा। इस दौरान जो बाउंड्री बनवाई थी, वह भी पानी को रोकने में नाकाम साबित हुई। सुबह से लेकर शाम तक जब पानी कम नहीं हुआ तो शाम को सभी बैरंग लौट गए। फिर सीबीआइ ने रात में ही ब्रिज कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। रविवार और सोमवार को ब्रिज कॉर्पोरेशन की टीम अटैना घाट पर पहुंची, लेकिन बढ़ते जलस्तर से कोई रणनीति तैयार नहीं कर पाई। मंगलवार को उम्मीद जताई जा रही थी कि इंजीनियर उपकरण लगाएंगे, लेकिन कोई भी घाट पर नहीं पहुंचा। इससे साफ जाहिर हो गया कि अब ब्रिज कॉर्पोरेशन की टीम भी कब्रों को बचाने में लाचार है।

अब पानी उतरने का इंतजार
दोनों किशोरियों के शवों का दोबारा पोस्टमार्टम कराने के इरादे पर सीबीआइ कायम है। सीबीआइ का कहना है थोड़ा भी पानी कम होते ही शवों को निकलवाने के प्रयास किए जाएंगे। फिलहाल कब्रों के ऊपर लगभग पांच से छह फुट तक की ऊंचाई में पानी बह रहा है। ब्रिज कार्पोरेशन का मानना है कि अगर तीन फिट भी पानी कम हो जाए तो शवों को निकालने के प्रयास शुरू किए जा सकते है।

ग्रामीणों से की पूछताछ
सीबीआइ की टीम सुबह के वक्त गांव पहुंची। सीबीआइ गांव से तीन लोगों को लेकर कैंप कार्यालय आ गई, जहां काफी देर तक अलग-अलग पूछताछ की गई। मंगलवार को सीबीआइ फिर से कटरा पहुंची। सीबीआइ सबसे पहले आम की बगिया में पहुंची, जहां कुछ देर विचार-विमर्श के बाद टीम उस स्थान पर पहुंची, जहां कांड के मुख्य गवाह बाबूराम उर्फ नजरू ने बताया था कि पप्पू यादव ने उसके साथ हाथापाई की थी। टीम घटनास्थल के पास रहने वाले रामभरोसे, मूलचंद्र और शिशुपाल के घर पहुंची। तीनों से जिला मुख्यालय स्थित अपने कैंप कार्यालय में देर शाम तक अलग-अलग पूछताछ की गई।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.