/आखिर कब तक झूठ बोलेगा अमूल..

आखिर कब तक झूठ बोलेगा अमूल..

-सुरेन्द्र ग्रोवर||

जब मैंने इक्कीस जुलाई को जैसलमेर में अमूल के गोल्ड दूध की थैली पर तेइस जुलाई की तारीख देखी तो तुरंत उसकी तस्वीर अपनी फेसबुक वाल पर अमूल को टैग करते हुए चस्पा कर मित्रों को अमूल की बदमाशी के बारे में बताया. इसके तुरंत बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. जब हर सैम सामयिक घटना को व्यंग्य के ज़रिये विज्ञापित करने वाले अमूल ने अपनी गलती स्वीकारने के बजाय लचर सी दलील देते हुए अपने फेसबुक पेज पर बताया कि यह पैकिंग की तारीख नहीं बल्कि उपयोग करने की आखिरी तारीख है.Screenshot_2014-07-22-14-11-03

IMG_20140724_120754अमूल द्वारा दी गयी वो सफाई कुछ इस तरह है:

Dear our esteemed customers! This is in response to the picture of Amul Pouch Milk packet currently being circulated on whatsapp and other social media channels.
Wish to inform you that under current FSSAI regulations- Food products, having shelf life of less than 7 days, should have to print the “use by date” on their packing’s.
So, 23rd July’2014 is the use by date and not the packing date. This info. is also printed on the packets (please see attached). Thanks!

यहाँ यह भी बताना उचित समझूंगा कि FSSAI के नियम साफ़ साफ़ कहते हैं कि हर खाद्य वास्तु की पैकिंग पर उत्पादन की तारीख, पैकिंग की तारीख, उपयोग की अंतिम तारीख के अलावा बैच नम्बर स्पष्ट तौर पर छपा होना ज़रूरी है. मगर अमूल को इस कानून की कोई चिंता नहीं.Screenshot_2014-07-24-20-07-52
मैं यहाँ अमूल से यह पूछना चाहता हूँ कि ऐसा सिर्फ दूध के साथ ही है या उसके द्वारा निर्मित हर दुग्ध उत्पाद के साथ है..?

मैं यहाँ यह रेखांकित करना चाहता हूँ कि इसके बाद मैंने अमूल के करीब करीब उत्पादों का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि उसके हर उत्पाद पर पैकेजिंग डेट है न कि यूज बिफोर.

इसका सीधा सीधा सा अर्थ यह है कि अमूल अपनी इस बदमाशी को सुधारने की बजाय जारी रखने में विश्वास रखता है.

यदि ऐसा नहीं है तो अमूल अपनी दूध की थैलियों पर पैकिंग और यूज बिफोर दोनों डालता. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. क्योंकि ऐसा करने से उसका दूध दूर दराज़ के इलाकों में पहुँचते पहुँचते ख़राब हो जायेगा फिर बिकेगा कैसे..? यही नहीं दूध की थैली पर तारीख कहीं और है और यूज बिफोर कहीं और छपा है. जो कि अमूल की बदमाशी ज़ाहिर करने के लिए पर्याप्त है.IMG_20140724_120843

एक बार आपने दूध खरीद कर खोल लिया और दूध फट गया तो अमूल किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं लेता मगर थैली में जमा हुआ दूध खरीदेगा कौन?

2014-07-24 12.16.58जैसलमेर और जोधपुर की कई गृहणियों और कई बड़े होटलों से पता करने पर सामने आया कि उन होटलों में अक्सर ऐसा होता है कि अमूल का दूध खरीद कर उबालते ही फट जाता है जबकि उस पर डेट आगे की डली होती है और वे लोग इसकी कहीं शिकायत भी नहीं कर पाते.

गौरतलब है कि गुजरात के आनंद से पूरे उत्तर भारत ही नहीं दक्षिण भारत के भी कई शहरों में अमूल का दूध वितरित होता है. जब हमने सोशल मीडिया के ज़रिये अमूल के दूध की थैली पर छपी आगे की तारीख का मुद्दा उठाया तो कई लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि “इतना गाढ़ा होता किस जानवर का है.”

अमूल के सामने अब सवाल दूध की शुद्धता की भी है.उसे यह भी बताना चाहिए कि ये थैली बंद दूध इतना गाढ़ा क्यों होता है. क्योंकि गाय हो या भैंस दोनों इतना गाढ़ा दूध नहीं देते. फिर अमूल का दूध इतना गाढ़ा कैसे हो जाता है..?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.