/विश्व के टॉप टेन अमीर खिलाडियों में भारत से अकेले महेन्द्र सिंह धोनी..

विश्व के टॉप टेन अमीर खिलाडियों में भारत से अकेले महेन्द्र सिंह धोनी..

जोहान्सबर्ग : भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी दुनिया के पांचवें सबसे अमीर खिलाड़ी हैं। फोर्ब्स मैगजीन की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।dhoni_660_040614115331_061214121132

फोर्ब्स की रिपोर्ट में धोनी से आगे रोजर फेडरर, टाइगर वुड्स, लेब्रन जेम्स, फिल मिकलसन और मारिया शारापोवा हैं। रिपोर्ट में धोनी की कुल कमाई 21 मिलियन डॉलर (126 करोड़ रुपए) बताई गई है।

रिपोर्ट में स्विट्जरलैंड के टेनिस स्टार फेडरर और अमेरिकी गोल्फ खिलाड़ी वुड्स 46 मिलियन डॉलर की कमाई के साथ पहले नंबर पर हैं। इनके बाद बास्केटबॉल खिलाड़ी लेब्रन जेम्स 27 मिलियन डॉलर की कमाई के साथ दूसरे नंबर पर हैं।

फेडरर और वुड्स 46 मिलियन डॉलर बराबर की कमाई के साथ पहले जबकि धोनी 21 मिलियन डॉलर की कमाई के साथ पांचवे स्थान पर हैं।

फेडरर ने रेकॉर्ड 17 ग्रैंड स्लैम जीते हैं, जबकि वुड्स ने 14 बड़े गोल्फ खिताब अपने नाम किए हैं। वुड्स के आगे इस रेकॉर्ड बुक में जैक निकलॉस का ही नाम है जिन्होंने 18 खिताब अपने नाम किए हैं।

सबसे ज्यादा कमाई करने वाले 10 खिलाड़ी

1. रोजर फेडरर (टेनिस) और टाइगर वुड्स (गोल्फ): 46 मिलियन डॉलर (276 करोड़ रुपए)

2. लेब्रन जेम्स (बास्केटबॉल): 27 मिलियन डॉलर (162 करोड़ रुपए)

3. फिल मिकलसन (गोल्फ): 25 मिलियन डॉलर (150 करोड़ रुपए)

4. मारिया शारापोवा (टेनिस): 23 मिलियन डॉलर (138 करोड़ रुपए)

5. महेंद्र सिंह धोनी (क्रिकेट): 21 मिलियन डॉलर (126 करोड़ रुपए)

6. उसैन बोल्ट (ट्रैक ऐंड फील्ड): 20 मिलियन डॉलर (120 करोड़ रुपए)

7. कोबे ब्रेयंट (बास्केटबॉल): 19 मिलियन डॉलर (114 करोड़ रुपए)

8. ली ना (टेनिस): 15 मिलियन डॉलर (90 करोड़ रुपए)

9. क्रिस्टियानो रोनाल्डो (फुटबॉल): 13 मिलियन डॉलर (78 करोड़ रुपए)

10. लियोनेल मेसी (पुटबॉल): 13 मिलियन डॉलर (78 करोड़ रुपए)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.