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UPSC के पैटर्न पर सरकार ने मांगी एक हफ्ते की मोहलत..

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा से सी-सैट को वापस लिए जाने की मांग को लेकर सड़क से लेकर संसद तक जमकर बवाल हुआ. संसद में जहां विपक्षी सांसदों ने इस मामले में सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं छात्र सड़कों पर उतर आए. सरकार की ओर से इस मसले पर राज्यसभा में बयान देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि हमें छात्रों से हमदर्दी है और उनके हितों की अनदेखी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि कमिटी को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है और उसके बाद पैटर्न पर फैसला हो जाएगा. जितेंद्र सिंह ने आश्वस्त किया ऐडमिट कार्ड जारी होना यूपीएससी के कैलेंडर के मुताबिक है और छात्रों को इससे चिंतित होने की जरूरत नहीं है.upsc csat issue

इससे पहले संसद का घेराव करने जा रहे छात्रों में से करीब 100 को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया. मेट्रो के दो स्टेशनों केंद्रीय सचिवालय और उद्योग भवन बंद कर दिए गए हैं. दिल्ली पुलिस की कोशिश है कि किसी भी तरह छात्रों को संसद भवन न पहुंचने दिया जाए. प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लेकर उनकी पिटाई की तस्वीरों से नया विवाद खड़ा हो गया है. टीवी फुटेज में एडिशनल सीपी एसबीएस त्यागी खुद छात्रों के साथ जबर्दस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं.

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में सी-सैट को वापस लिए जाने और प्रश्नों के हिन्दी में घटिया अनुवाद के विरोध में गुरुवार को छात्र सड़कों पर उतर आए. दरअसल, छात्र इस बात से उत्तेजित थे कि केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद संघ लोक सेवा आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी करने शुरू कर दिए हैं. 24 अगस्त को प्रारंभिक परीक्षा है और छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनसे वादा किया था कि जब तक सी-सैट का मुद्दा नहीं सुलझ जाता है, तब तक परीक्षा नहीं ली जाएगी.

छात्रों के हंगामे के बाद शुक्रवार सुबह कार्मिक मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह प्रधानमंत्री से मिले और उन्होंने छात्रों से संयम रखने की अपील की. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया है कि सरकार छात्रों के हित में काम करेगी.

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर आरजेडी सांसद पप्पू यादव, जयप्रकाश नारायण यादव, एसपी के धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, जदयू के कौशलेंन्द्र कुमार यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने वाले आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस के बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए अध्यक्ष की सीट के पास आ गए. सदस्यों ने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ भी हुई. अध्यक्ष ने हालांकि सदस्यों को अपने स्थान पर जाने और शून्यकाल में इस विषय को उठाने कहा. पप्पू यादव ने कहा कि आश्वासन के बाद भी सी-सैट वापस नहीं लिया गया और छात्रों के साथ मारपीट की गई.

एसपी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि भारतीय भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और इन्हें उचित स्थान दिया जाना चाहिए. इस पर अध्यक्ष ने कहा कि इस विषय पर मंत्री ने बयान दिया है और इस विषय को शून्यकाल में उठाए. सभी लोगों को भारतीय भाषाओं से प्रेम है.

विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. इस वजह से सदन में आज प्रश्नकाल नहीं चल सका. सुबह राज्यसभा की बैठक शुरू होने के बाद विपक्षी दलों के सदस्यों ने यूपीएससी परीक्षा को लेकर छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री के बयान की मांग की. जेडी (यू) के शरद यादव, समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल सहित कई अन्य सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया.

सभापति ने सदस्यों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि इस मामले पर संबंधित मंत्री 12 बजे सदन में आएंगे और सदस्यों को प्रश्नकाल चलने देना चाहिए. लेकिन हंगामा कर रहे सदस्य शांत नहीं हुए और समाजवादी पार्टी के कुछ सदस्य आसन के समीप आ गए. हंगामा थमते नहीं देख सभापति ने कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी.

सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने ती नरेश अग्रवाल ने कल दिल्ली में हुए यूपीएससी परीक्षार्थियों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने वादा किया था कि अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म होगी. उन्होंने प्रधानमंत्री को बुलाए जाने की मांग की. बीजेपी के मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि छात्रों की मांग और आंदोलन जायज है और सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए. इस बीच कांग्रेस के सत्यव्रत चतुर्वेदी और कई अन्य सदस्य भी कुछ बोलते दिखे लेकिन शोरगुल में उनकी बात सुनी नहीं जा सकी.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह ऐसा विषय है जिस पर पूरे सदन की एक राय है. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है और 12 बजे इस पर चर्चा होनी है. उन्होंने कहा कि थोड़ी देर की बात है और 12 बजे इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है. लेकिन प्रधानमंत्री के बयान की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और सभापति ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

इससे पहले गुरुवार रात सी-सैट का विरोध कर रहे छात्रों ने गुरुवार रात मुखर्जी नगर इलाके में जबर्दस्त तोड़फोड़ की और बवाल मचाया. प्रदर्शनकारी छात्रों ने पत्थरबाजी की और कई गाड़ियों को अपना निशाना बनाया. मिली जानकारी के मुताबिक, छात्रों ने एक बस और पुलिस वैन में आग लगा दी. साथ ही, एक बाइक भी फूंक डाली. पुलिस ने बेकाबू हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को नियंत्रण में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.