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आधुनिक समाज के ‘पंडितजी’ हैं ये ब्रांड एंबेसडर..

By   /  July 26, 2014  /  1 Comment

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​-तारकेश ओझा||

मेरे स्वर्गीय पिता के दसवें पर श्मशान घाट पर कर्मकांड कराने वाले महाब्राह्णण ने कुछ घंटे की पूजा के एवज में परिजनों से मोटी रकम वसूल ली. तिस पर तुर्रा यह कि पुरानी जान – पहचान के चलते उन्होंने अपनी ओर से कोई विशेष मांग नहीं रखी. जो दे दिया , उसी में संतोष कर लिया. वर्ना गोदान से लेकर शैय्या दान आदि के मद में खर्च इससे कई गुना ज्यादा होनी तय थी. मैं मन ही मन सोच रहा था कि कुछ देर की पूजा के लिए पंडितजी ने जितनी रकम झटक ली, वह देश के हजारों लोगों की महीने भर की तनख्वाह होगी. जिससे वे अपने पूरे परिवार का खर्च चलाते होंगे.

श्मशान से घर लौटे तो शुद्धिकरण के तहत एक और पूजा हुई, जिसे परिवार के परंपरागत पंडित ने संपन्न कराया. पूजा संपन्न होने के बाद बात लेने – देने की अाई तो पंडितजी ने पूछा… स्वर्गीय पिता का सवाल है, सच – सच बताना , श्मशान में महाब्राह्मण को कितना दिया था…. जो दिया उसका दोगुना लूंगा. क्योंकि परिवार के सारे शुभ कार्य मैं संपन्न कराता हूं…. पंडितजी के मुंह से यह सुन कर मैं हक्का – बक्का रह गया था. कर्मकांड पर होने वाले खर्च को वहन कर पाने में इधर हमारी कमर ढीली हुई जा रही थी, उधर पंडितों की टोली मांगों की फेहरिस्त सामने रख रहीथेी.

इसी तरह कुछ साल पहले घर के एक बच्चे के मुंडन संस्कार के लिए परिवार के लोग चारपहिया वाहन से एक तीर्थ स्थल पर गए. वाहन का मालिक व चालक मोहल्ले का ही रहने वाला था. परिजनों की वापसी के बाद मुझे पता चला कि लाखों रुपए के वाहन को खुद चला कर लाने – ले जाने वाले ने जितनी रकम ली, लगभग उतनी ही रकम तीर्थ स्थल पर मुंडन संस्कार कराने वाले पंडितों ने वसूल ली.

मेरे ख्याल से अपने देश में तथाकथित ब्रांड एंबेसडरों की हालत भी इन पंडितों की तरह ही है. जब तक कुछ बनने – बनाने की कष्ट साध्य प्रक्रिया चलेगी, इनका कहीं अता – पता नजर नहीं आएगा. लेकिन जैसे ही कहीं कुछ तैयार होगा ये कथित सेलीब्रिटीज कृपापूर्वक चेक हासिल करने वहां पहुंच जाएंगे. देश के सबसे बड़े उत्तर प्रदेश में जैसे ही मुलायम सिंह यादव की समाजवादी सरकार बनी. अमिताभ बच्चन..यूपी में है दम … जैसा कुछ कहते हुए वहां के ब्रांड एंबेसडर बन गए. इसके एवज में बच्चन साहब ने क्या लिया , यह तो पता नहीं. लेकिन इतना तय है कि उनके ब्रांड एंबेसडर बनने से यूपी का जरा भी भला नहीं हुआ.

इसी तरह पश्चिम बंगाल में भारी उथल – पुथल और खून – खराबे के बाद कम्युनिस्टों के लगातार 34 साल के शासनकाल का खात्मा हुआ, और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी. लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही शाहरुख खान राज्य के कथित ब्रांड एंबेसडर बने या बना दिए गए.

सुना है कि यूपीए सरकार में मंत्री रही अंबिका सोनी आमिर खान को अपने विभाग का ब्रांड एंबेसडर बनाने कोे इस कदर उतावली थी कि उन्होंने इसके एवज में मोटी रकम के साथ ही उन्हें हेलीकाप्टर तक देने की पेशकश कर दी थी. इसी तरह तेलंगाना राज्य के अस्तित्व में आने की पृष्ठभूमि में इतना पता है कि इस राज्य के बनने तक भारी अराजकता व हिंसा लगातार होती रही.

इधर राज्य बना उधर सानिया मिर्जा प्रदेश की ब्रांड एंबेसडर बना दी गई. राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के साथ एक करोड़ रुपयों का चेक थामे दोनों की मुस्कुराती फोटो अखबारों में छपी. हालांकि समझना मुश्किल है कि किसी राज्य का ब्रांड एंबेसडर बनने – बनाने से आखिरकार उस प्रदेश का क्या और कितना भला होता है. साथ ही यह भी कि राजनेताओं की यह आखिरकार कैसी मजबूरी या बीमारी है कि सत्ता संभालते ही सारी बातें भूल कर उन्हें सबसे पहले ब्रांड एंबेसडर की तलाश जरूरी लगती है. इस पर पैसा पानी की तरह बहाने से भी उन्हें गुरेज नहीं होता.

(लेखक दैनिक जागरण से जुड़े हैं.)

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  • Published: 3 years ago on July 26, 2014
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  • Last Modified: July 26, 2014 @ 9:35 pm
  • Filed Under: बहस

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. यह ब्रांड एम्बेसडर करते क्या हैं ?जुम्मा जुम्मा चार माह पहले जन्मी तेलंगाना सरकार को जान हिट का और कोई काम याद नहीं आया , एक करोड़ में ब्रांड एम्बेसेडर बनाना याद आया कितने ही अभिनेता अलग अलग सरकारी विभागों के एम्बेसेडर बने बैठे हैं , जिन्हें उन नेताओं ने oblidge करने के लिए चुना पर सिवाय एक दो बार टी वी पर विज्ञापन करने के अलावा उन्होंने क्या किया ?जनता पर उसका क्या प्रभाव पड़ा कभी इसका भी मूल्यांकन करना याद आया ?अमिताभ के तो विज्ञापन आते भी थे पर अन्य लोगों के वे भी दिखाई नहीं दिए यह सब बकवास है जनता के पैसे की बर्बादी है यदि सरकारें काम करे तो उन्हें इनकी जरुरत ही न पड़े , , निकम्मे नेता अपने नकारेपन को छिपाने के लिए इस प्रकार के हथकंडे अपनाते हैं

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