/कैमरे के सामने रो पड़ी सानिया..

कैमरे के सामने रो पड़ी सानिया..

भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा खुद को पाकिस्तान की बहू और बाहरी बताए जाने के आरोपों से काफी दुखी हैं. शुक्रवार को एक अंग्रेजी न्यूज चैनल से बात करते हुए वे खुद को संभाल नहीं पाईं और कैमरे के सामने ही उनके आंसू छलक गए. सानिया काफी देर तक सुबकती रहीं. उन्होंने सवाल किया, ”क्या दूसरे देशों में भी ऐसा होता है? क्या मुझे सिर्फ इसलिए टारगेट किया जा रहा है, क्योंकि मैं महिला हूं?” सोनिया ने यह भी कहा कि उन्हें आखिर कितनी बार भारतीयता साबित करनी होगी?sania

चैनल से बातचीत में सानिया ने कहा, ”जो हो रहा है, वो बहुत दुखद है. मैं जब तक जिंदा हूँ, भारतीय ही रहूंगी. मैंने शादी के बाद भारत के लिए कई मेडल जीते. इसके बावजूद मुझ पर पाकिस्तानी होने के आरोप लग रहे हैं, जो सही नहीं हैं. मेरी जड़े इसी मिट्टी में हैं. इस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. मुझे भारतीय नागरिक होने पर मुझे गर्व है. मेरी भारतीयता और देशभक्ति पर सवाल उठाना अन्याय है.”

सानिया के ब्रांड एंबेसडर बनने से उठे थे सवाल
सानिया को तेलंगाना राज्य का ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने पर राज्य के बीजेपी नेता के. लक्ष्मण ने कहा था कि सानिया मिर्जा पाकिस्तान की बहू हैं इसलिए उनको ब्रांड एंबेसडर नहीं बनाया जाना चाहिए. इसके बाद पूरे देश में बहस छिड़ गई. हालांकि सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह साफ कर दिया कि यह बीजेपी का नहीं, बल्कि उस सांसद का निजी बयान है. जावड़ेकर ने कहा कि भारत को सानिया मिर्जा पर गर्व है. कांग्रेस व अधिकांश विपक्षी पार्टियों ने भी सानिया पर भरोसा जताया था. बता दें कि सानिया का जन्म महाराष्ट्र में हुआ है लेकिन उनका परिवार हैदराबाद में रहता है. सानिया की शादी पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक के साथ हुई है.

(भास्कर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.