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शिवसेना नेता की टिप्पणी बुरी लगी मोदी को..

By   /  July 26, 2014  /  No Comments

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e7909c95289a5113540f6a7067006205प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों अपनी सहयोगी पार्टी शिवसेना के नेता संजय राउत की एक टिप्पणी से आहत हैं और उन्होंने अपनी नाराजगी का संदेश पार्टी सुप्रीम उद्धव ठाकरे तक पहुंचवा दिया है। संजय राउत द्वारा राजनीतिक हमले के लिए उनकी मां का नाम इस्तेमाल किए जाने की बात मोदी को चुभ गई है। राउत ने कहा था कि ‘साड़ी और शॉल’ की डिप्लमेसी नहीं चलेगी।

गौरतलब है कि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह मे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया गया था। इसके बाद मोदी ने उनकी मां के लिए शॉल भिजवाया था और जवाब में शरीफ ने मोदी की मां हीरा बेन के लिए साड़ी भिजवाई थी। इस सप्ताह के शुरू में अखनूर सेक्टर में सीमा पर पाकिस्तानी फायरिंग में सेना के एक जवान की मौत पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘यह शॉल-साड़ी कूटनीति है क्या? पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए। जवान की मौत का करारा जवाब दिया जाना चाहिए।’

अंग्रेजी अखबार डीएनए ने एनडीए सरकार के एक मंत्री के हवाले से खबर दी है कि राउत के इस बयान से मोदी काफी नाराज हैं। बताया गया है कि उद्धव ठाकरे को भेजे संदेश में मोदी मे कहा, ‘विपक्षी दलों द्वारा भी ऐसी टिप्पणी नहीं की गई है। शिवसेना भी मां से जोड़कर व्यक्तिगत हमला न करे।’ संजय राउत ने इस बारे में सवाल करने पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने केवल इतना कहा कि बाद में बात करेंगे।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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