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मार्कंडेय काटजू बोले न्यायपालिका का काला चेहरा उजागर नहीं करूँगा अब..

By   /  July 28, 2014  /  No Comments

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प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने रविवार को अपने ब्लॉग में लिखा कि वो कभी भी अपना संस्मरण नहीं लिखना चाहेंगे. काटजू ने हाल ही में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर बड़ा राज फ़ाश किया था जिसे लेकर कई दिग्गजों ने उन्हें आड़े हाथों भी लिया. इसीलिए काटजू ने फैसला किया है कि वो अपना संस्मरण नहीं लिखेंगे.markandey-katju

काटजू का मानना है कि वो न्यायपालिका के काले चेहरे से वाकिफ हैं और इस तरह की घटनाओं का सावर्जनिक मंच पर जिक्र करना मुसीबतों का पिटारा खोलने जैसा होगा. काटजू ने यहां तक कहा कि अगर उन्होंने सभी बातों का खुलासा कर दिया तो ऐसा तूफान मचेगा जिसके परिणाम का सामना वो खुद नहीं कर सकेंगे.

गौरतलब है कि काटजू ने हाल ही में दावा किया था कि तमिलनाडु की एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप होने के बावजूद उसे मद्रास हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया.

काटजू ने मनमोहन सिंह और उनकी सरकार पर भी भ्रष्ट जज को बचाने का आरोप लगाया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तीन चीफ जस्टिस पर भी भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे. काटजू ने कहा कि मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार बचाने के लिए एक भ्रष्ट शख्स को मद्रास हाई कोर्ट का एडिशनल जज बने रहने दिया.

27 जुलाई को अपने ब्लॉग में काटजू ने लिखा था कि क्यों मैं अपनी जीवनी नहीं लिखूंगा. फेसबुक पर बने उनके पेज एक कमेंट था कि मुझे संस्मरण लिखना चाहिए. मैंने उसका जवाब दिया कि मैं कभी ऐसा नहीं करूंगा. उस शख्स ने मुझसे पूछा क्यों? मैंने कहा सिर्फ एक घटना (मद्रास हाई कोर्ट जज) का जिक्र करने पर मुझ पर कई लोगों ने हमला बोल दिया. सभी घटनाओं का जिक्र करना मुसीबत का पिटारा खोलने जैसा होगा. मैं न्यायपालिका में कई लेवल पर (वकील, हाई कोर्ट जज, चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट जज) काम कर चुका हूं और इसका काला चेहरा देख चुका हूं, तो सभी घटनाओं का खुलासा करना एक ऐसा तूफान मचा देगा जिसका सामना मैं शायद खुद भी ना कर सकूं.

 

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  • Published: 3 years ago on July 28, 2014
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  • Last Modified: July 28, 2014 @ 9:15 am
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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