/हैवानियत की हद पार करते हुए दुष्कर्म पीड़िता को निर्वस्त्र कर ठोकी कील..

हैवानियत की हद पार करते हुए दुष्कर्म पीड़िता को निर्वस्त्र कर ठोकी कील..

रोहतक, दुष्कर्म पीड़िता से मुकदमा दर्ज कराने का बदला लेने के लिए आरोपियों ने हैवानियत की हदें पार कर दी. आरोपियों ने परिजनों के साथ मिलकर महिला को पति समेत अगवा कर लिया और घर में तीन घंटे तक बंधक बनाकर यातनाएं दीं. निर्वस्त्र कर उसके शरीर में दो स्थानों पर कील ठोक दी.rape1

पीजीआइएमएस के वार्ड नंबर पांच में भर्ती कलानौर थाना क्षेत्र की महिला ने बताया कि ढाई माह पहले दो लोगों ने जान से मारने की धमकी देकर उससे दुष्कर्म किया था. मामला पुलिस में दर्ज कराने से क्षुब्ध होकर आरोपी और उनके परिजन 23 जुलाई की रात उसके घर में घुस आए तथा महिला और उसके पति को अगवा कर अपने घर में बंधक बना लिया. महिला के पति को आरोपियों ने एक कमरे में बांध दिया. इसके बाद महिला को निर्वस्त्र कर बुरी तरह पीटा और उसके शरीर में दो स्थान पर कील ठोक दी. इससे महिला जख्मी हो गई.

महिला का कहना है कि तीन घंटे बाद उसे बंधन मुक्त किया गया. इसकी सूचना पर पुलिस ने मौके पर पड़ताल की और पीड़िता को सिविल अस्पताल भेज दिया. यहां से वह घर लौट गई. जख्म में संक्रमण होने पर उसे पीजीआइएमएस में भर्ती कराया गया. महिला का कहना है कि पुलिस शिकायत के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही है.

पुलिस का कहना:
महिला ने दुष्कर्म का जो केस दर्ज करवाया था, वह सुबूतों के अभाव में खत्म हो चुका है. अब उससे मारपीट का मामला सामने आया है. उसकी जांच चल रही है. अगर मेडिकल रिपोर्ट में कील के जख्म आते हैं, तो धाराएं तरमीम कर आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी.
-रमेश कुमार, एसएचओ कलानौर

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.