/कैश फॉर वोट: अमर सिंह के वकील राम जेठमलानी बोले, ”बीजेपी ने जुटाया था धन!”

कैश फॉर वोट: अमर सिंह के वकील राम जेठमलानी बोले, ”बीजेपी ने जुटाया था धन!”

नोट के बदले वोट मामले में न्यायिक हिरासत में मौजूद अमर सिंह के वकील राम जेठमलानी ने सोमवार को अंतरिम जमानत याचिका पर बहस करते हुए कहा कि बीजेपी ने उन नोटों का इंतजाम किया था जो सांसद सदन के भीतर लेकर गए थे।

जेठमलानी ने कोर्ट से यह भी अपील की है कि अमर सिंह को जमानत दे दी जाए ताकि वह अपनी बीमार पत्नी की देखभाल कर सकें।   जेठमलानी ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने खुद स्वीकार किया है कि उन्होंने पूरे ऑपरेशन को हरी झंडी दिखाई थी। इसलिए ऐसा संभव है कि पैसे का इंतजाम बीजेपी ने किया हो।

भाजपा सांसद राम जेठमलानी के इस बयान से अदालत में विचित्र स्थिति पैदा हो गई जब उन्होंने दावा किया कि नोटों के बदले वोट मामले में लोकसभा में लहराए गए नोट भाजपा के हो सकते हैं।

समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह के लिए अंतरिम जमानत की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल से कहा कि इस घोटाले के सह-आरोपी संजीव सक्सेना ने भी अपने जमानत के आवेदन में कहा है कि जिस धन को उसने सांसदों को सौंपा था, वह भाजपा कोषाध्यक्ष से हासिल हुआ था।

जेठमलानी ने कहा कि अगर भाजपा सांसदों ने [लोकसभा में] नोट लहराए थे, तो धन का स्रोत भाजपा है। मैं किसी के मामले में पक्षपात नहीं कर रहा।

लेकिन समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव और राज्यसभा सांसद अमर सिंह को सोमवार को भी जमानत नहीं मिल सकी।  गौरतलब है कि मशहूर वकील राम जेठमलानी खुद बीजेपी के सदस्य हैं। विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल  ने सिंह की जमानत याचिका पर फैसला कल तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

अमर सिंह को छह सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 19 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। सिंह के वकीलों ने उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए  जमानत की गुहार लगाई थी इस पर विशेष न्यायाधीश ने सिंह के स्वास्थ्य के संबंध में तिहाड़ जेल के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी।

शुक्रवार को सिंह के स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थी किन्तु अधिकारियों ने कहा था कि मूत्न और रक्त जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिल पाई है।

अदालत को सोमवार को सौंपी गई स्वास्थ्य रिपोर्ट में सिंह के मूत्न एवं रक्त जांच के नतीजे भी शामिल हैं। कल 2 बजे अदालत उनकी याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.