/नए गवर्नर के भय से हुड्‌डा ने संडे को गुपचुप में दिलाई कमिश्नर्स को शपथ..

नए गवर्नर के भय से हुड्‌डा ने संडे को गुपचुप में दिलाई कमिश्नर्स को शपथ..

चंडीगढ़,  हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने पॉलिटिकल एडवाइजर प्रो. बीरेंद्र की पत्नी समेत पांच लोग आयोगों के कमिश्नर बना दिए. उन्हें शपथ भी दिलवा दी. वो भी अपने घर पर और रविवार को छुट्‌टी के दिन. नए कमिश्नर्स को शपथ दिलवाने के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग का दफ्तर खुलवाया गया. ऐसा इसलिए, क्योंकि सरकार को आशंका थी कि नए गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी इन नियुिक्तयों को रोक सकते हैं.

1852_34राइट टू इन्फॉरमेशन कमीशन में प्रो. बीरेंद्र की पत्नी रेखारानी व सीएम के एडवाइजर (हेल्थ) शिव रमन गौड़, राइट टू सर्विस कमीशन में आईएएस अफसर सरबन सिंह, हाईकोर्ट की जज के पति डॉ. अमर सिंह व एडवोकेट सुनील कत्याल को नियुक्त किया है. फूड कमीशन में भी तीन नियुिक्तयां हुई हैं.

कहानी में टि्वस्ट तब आया, जब प्रशासनिक सुधार विभाग के सेक्रेटरी प्रदीप कासनी ने फाइल पर लिख दिया कि, “ये नियुक्तियां ही गैरकानूनी हैं. इन्हें अपॉइंटमेंट लैटर नहीं दिए गए हैं. इन्होंने मौजूदा पद भी नहीं छोड़े हैं. कुछ लाभ के पद पर हैं तो कुछ अयोग्य. इसलिए इस मामले को अपॉइंटिंग अथॉरिटी गवर्नर के ध्यान में लाया जाए.’

ऐसे चला शपथग्रहण समारोह का ड्रामा

सरकार ने शपथ दिलाए जाने के कार्यक्रम को गुप्त रखने की पूरी कोशिश की. न तो कमिश्नर्स के परिवार के सदस्य बुलाए गए और न ही मीडिया को सूचना दी गई. मीडिया कर्मियों के पूछे जाने पर कहा जाता रहा कि शपथ एक अगस्त को नए गवर्नर दिलवाएंगे. मीडियाकर्मी सीएम हाउस पहुंचे तो गेट पर यह कहकर रोक दिया गया कि अंदर कोई फंक्शन नहीं है. बाद में चीफ सेक्रेटरी एससी चौधरी ने मीडिया को अंदर जाने की इजाजत दिलवाई.

कमिश्नर बोले-नियुक्ति पत्र मिल गए, विभाग का इनकार

इन्फॉरमेशन कमिश्नर शिव रमन गौड़ ने बताया कि उन्हें नियुक्ति पत्र मिल चुका है और एडवाइजर सीएम (हेल्थ) का पद उन्होंने छोड़ दिया है. इसी तरह राइट टू सर्विस कमिश्नर सरबन सिंह ने कहा कि उन्होंने एिडशनल चीफ सेक्रेटरी (पीएचईडी) पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्हें भी नियुक्ति पत्र मिल गया है. दूसरी ओर प्रशासनिक सुधार विभाग के सेक्रेटरी प्रदीप कासनी ने कहा कि किसी को नियुिक्त पत्र नहीं दिया गया है.
इनेलो नए राज्यपाल को सौंपेगा ज्ञापन

इनेलो का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही हरियाणा के नए राज्यपाल कप्तान सिंह सौलंकी से मुलाकात कर उन्हें हुड्डा सरकार द्वारा सत्ता से जाते-जाते सारे नियम कायदे तोडक़र अहम पदों पर अपने चहेतों को नियुक्त किए जाने और सभी संविधानिक, लोकतांत्रिक व सामाजिक मर्यादाओं का हनन किए जाने संबंधी मामलों का विस्तार से ब्यौरा देते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा.

इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सत्ता से जाते-जाते गैरकानूनी रूप से नियुक्तियां करने में लगे हुए हैं जो कि पूरी तरह से गलत एवं नियम कायदों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इस बारे में सभी तथ्यों सहित राज्यपाल को अवगत करवाया जाएगा और हुड्डा सरकार के खिलाफ कार्यवाही किए जाने का आह्वान किया जाएगा.

इसलिए गैरकानूनी हैं ये नियुिक्तयां

1. सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं माना

सुप्रीम कोर्ट ने सेंटर फॉर पीआईएल के मामले में 3 मार्च, 2011 के आदेश में कहा था कि ऐसी नियुक्तियों के मामलों में विपक्ष के नेता की असहमति पर विचार होना चािहए. चयन कमेटी के दो सदस्य उनकी राय से असहमत होने के कारण लिखेंगे. विपक्ष के नेता ओम प्रकाश चौटाला हैं और वे नियुिक्तयों पर आपत्ति जता चुके हैं. भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज भी इसके खिलाफ हैं.

2. सर्च कमेटी ने सिफारिश ही नहीं की

नियुिक्तयों के लिए बनाई कई सर्च कमेटी ने विजय नरूला के नाम की सिफारिश ही नहीं की थी. उन्हें भी इन्फाॅरमेशन कमिश्नर बनाया गया है. हालांकि, उन्होंने अभी शपथ नहीं ली है. राइट टू सर्विस कमीशन कमिश्नर की नियुक्ति एक्ट की धारा 13 (3) के खिलाफ हैं. एक्ट के मुताबिक, दो सदस्य रिटायर्ड आईएएस होने चाहिए, जबकि अमर सिंह ईटीसी कमिश्नर रहे हैं, जो इससे निचली श्रेणी का पद है.

3. धारा-15(6) के भी खिलाफ

इन्फॉरमेशन कमीशन में उच्चस्तरीय कमेटी ने लीडर अपोजीशन की सहमति लिए बिना रिटायर्ड आईएएस शिव रमन गौड़, रेखा रानी और विजय कुमार नरूला की सिफारिश की थी. रेखा अिसस्टेंट डायरेक्टर(एजुकेशन) थीं, जो ग्रुप बी कैटेगरी का पद है. इस तरह सीएम की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश आरटीआई एक्ट की धारा 15 (6) का उल्लंघन है.

4. विभागीय नोट में भी हुई हेराफेरी

सरकार ने शपथ दिलवाने के लिए सीएम को अधिकृत करने संबंधी मंजूरी पूर्व गवर्नर जगन्नाथ पहािड़या से शुक्रवार को ही ली थी. नोटशीट में बाद में किसी ने पेन से एक लाइन जोड़ दी कि नियुक्त लोगों के नामों का भी गवर्नर अनुमोदन करते हैं. इस बारे में प्रदीप कासनी का कहना है कि नोट में पेन से लिखी गई लाइन की राइटिंग उनकी नहीं है.

(भास्कर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.