/ज्‍योति हत्‍याकांड में पूछताछ के लिए पुलिस ने पति को हिरासत में लिया..

ज्‍योति हत्‍याकांड में पूछताछ के लिए पुलिस ने पति को हिरासत में लिया..

कानपुर में एक व्यापारी की पत्नी ज्योति को अगवा करने के बाद हत्या क्र देने के मामले में पुलिस पुलिस ने मृतका के पति पीयूष को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है. क्योंकि  मृतका के पिता ने अपने दामाद तथा दामाद के पिता को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया था.jyoti

कानपुर में एक बिस्कुट व्यापारी की पत्नी की रविवार देर रात अगवा करने के बाद हत्या कर दी गई. मृतका का कल अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. मृतका ज्योति के पिता जबलपुर निवासी शंकर नामदेव का कहना है कि बड़े-बड़े मामलों का घंटों में खुलासा कर देने वाली कानपुर पुलिस मेरी पुत्री की हत्या के मामले में 48 घंटे बाद भी कुछ नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है. शंकर नामदेव ने अपने दामाद पीयूष तथा उसके पिता को भी संदेह के घेरे में ला दिया है.

उन्होंने कहा कि दामाद का उनकी पुत्री के प्रति व्यवहार अच्छा नहीं था. दोनों के संबंध भी सहज नहीं थे. उन्होंने बताया कि दामाद अपना मोबाइल फोन तक मेरी बेटी को नहीं छूने देता था. वह घंटों बाथरूम में बैठकर मोबाइल से किसी से बात करता रहता था. पुलिस ने मोबाइल फोन का काल डिटेल अभी तक नहीं निकलवाया है. उन्होंने कहा कि घटना वाली रात में पीयूष के पिता ने रात दो बजे फोन से दुर्घटना की सूचना दी. उन्होंने कहा कि दुर्घटना में पीयूष की मौत हो गई है जबकि ज्योति गंभीर रूप से घायल है. आप तुरंत आ जाओ. मैंने कहा कि कहीं आप मजाक तो नहीं कर रहे हो तो उन्होंने कहा कि अगर देर करोगे तो बेटी का मुंह नहीं देख पाओगे. ज्योति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से 15 चोटों के निशान मिले हैं. सनसनीखेज वारदात के बाद मुख्यमंत्री आवास से भी दो बार फोन पर पूछताछ की गयी.

गौरतलब है कि पांडुनगर निवासी ओम प्रकाश का बेटा पीयूष और बहू ज्योति रविवार रात में कहीं से घर लौट रहे थे. चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय वाली सड़क से रावतपुर की तरफ आने पर कुछ बाइक सवारों ने उनकी कार रोकी और पीयूष को पीट कर छोड़ दिया जबकि ज्योति को कार में बैठा कर ले गये. रात में पनकी के पास उनका शव मिला. पुलिस के अनुसार कार में खून से सने हुए तीन चाकू मिले हैं. कार में महंगा मोबाइल पड़ा होने से लूट की आशंका नहीं नजर आती है.

ओम प्रकाश की फ्लोर व गत्ता फैक्ट्री के अलावा स्वाति बिस्कुट के नाम से दादानगर में कारखाना है जहां पारले जी कंपनी के बिस्कुट बनते हैं. कल, कपड़ा व रेशम उद्योग मंत्री शिवकुमार बेरिया और दर्जा प्राप्त मंत्री चौधरी सुखराम सिंह यादव ने उनके घर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया. इस बीच मुख्यमंत्री आवास से भी घटना के बारे में दो बार फोन पर पूछताछ की गयी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.