/जेएनयू छात्र संघ के अध्‍यक्ष और संयुक्‍त सचिव पर यौन उत्पीडन का आरोप..

जेएनयू छात्र संघ के अध्‍यक्ष और संयुक्‍त सचिव पर यौन उत्पीडन का आरोप..

देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के अध्‍यक्ष और संयुक्‍त सचिव के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है.akbar chaudhary

जेएनयूएसयू के अध्यक्ष अकबर चौधरी और संयुक्त सचिव सरफराज अहमद के खिलाफ यूनिवर्सिटी की जेंडर सेंसटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरासमेंट में 24 जुलाई को एक शिकायत दर्ज करायी गयी है.

यह मामला रविवार को उस समय सामने आया जब विश्वविद्यालय परिसर में लगाये गये पोस्टरों में दो छात्र नेताओं ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का खंडन किया.

चौधरी और हामिद द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है ‘हम लोग अपने खिलाफ जीएससीएएसएच में दायर एक शिकायत के बारे में छात्र समुदाय को सूचना देना चाहते हैं. हम लोगों को इस शिकायत के बारे में 24 जुलाई को सूचना दी गयी और इससे हम लोग चौंक गये.’

उन्होंने कहा है ‘अगर जेएससीएएसएच शिकायत पर जांच करती है तो हम लोग जेएनयूएसयू और अपने संगठन में अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे.’ इस बीच जीएससीएएसएच के सदस्यों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है.

हालांकि जीएससीएएसएच के एक सदस्य ने बताया कि इस मामले को देखने के लिए एक समिति गठित की जाएगी. सदस्य ने बताया कि इस सप्ताह शिकायत जांच कमेटी की बैठक होगी और बाद में मामले की विस्तृत जांच की जाएगी.

कैम्पस के कुछ छात्रों का कहना है कि एमए इतिहास की जिस छात्रा ने आरोप लगाया है, वो पहले आईसा की ही समर्थक थी और मुज्जफरनगर दंगा पीड़ितों के लिए काम भी कर चुकी है. इसके कुछ समय बाद वह आईसा से दूर होने लगी तो उपरोक्त दोनों आरोपी उसे खींचते हुए होस्टल में ले गए थे. इसके बाद क्या हुआ उन्हें पता नहीं.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.