/संचार माध्यमों को जब्त करके ग्राम सभा को पर्दे के पीछे करवाने की तैयारी..

संचार माध्यमों को जब्त करके ग्राम सभा को पर्दे के पीछे करवाने की तैयारी..

सिंगरौली, महान संघर्ष समिति के अमिलिया स्थित कार्यालय पर पुलिस द्वारा छापा मारकर सिग्नल बुस्टर और सोलर पैनल के साथ-साथ बैटरी भी जब्त कर ली गई. यह सब उस समय सामने आया जब कलेक्टर ने खुद फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव की जगह एक निष्पक्ष ग्राम सभा करवाने की घोषणा की है.greenpeace

ग्रीनपीस की सिनियर कैंपेनर और महान संघर्ष समिति की सदस्य प्रिया पिल्लई ने कहा कि, निष्पक्ष ग्राम सभा के वादे पर हमलोग कैसे विश्वास करें, जब प्रशासन बाहरी दुनिया से संचार के हमारे माध्यमों को ही खत्म करने की कोशिश कर रही है, जिससे ग्राम सभा पर पर्दा डाला जा सके.

चार वन सत्याग्रहियों की गिरफ्तारी के बाद यह दूसरा प्रयास है जब पुलिस महान कोल लिमिटेड के खिलाफ चल रहे शांतिपूर्ण चल रहे विरोध को दबाने का प्रयास किया है. पिल्लई ने कहा कि आईबी रिपोर्ट के बाद यह दूसरा उदाहरण जो बताता है कि किस तरह सिविल सोसाइटी को कंपनी के हित में परेशान किया जा रहा है.

उन्होंने आगे जोड़ा कि, यह स्पष्ट उदाहरण है कि किस तरह पुलिस एक शांतिपूर्ण संघर्ष को दबाने का प्रयास कर रही है. हमलोगों को कल पुलिस ने एक नोटिस देकर बुस्टर और सोलर पैनल के बारे में पूछा था लेकिन हमें बिना समय दिए ही वे आज सुबह हमारे अमिलिया स्थित ऑफिस में छापा मारकर सोलर पैनल, बैटरी और बुस्टर को जब्त कर लिया. महान जैसे गैर बिजली वाले क्षेत्र में सोलर ऊर्जा बहुत जरुरी है.

यह छापा जबलपुर हाईकोर्ट के उस फैसले के महीने भर के भीतर आया है जिसमें उसने फर्जी ग्राम सभा पर एफआईआर दर्ज नहीं होने की वजह से एसपी को आदेश दिया था. कोर्ट ने एसपी को 7 दिनों के भीतर जांच करने का आदेश दिया था तथा 30 दिनों में निष्कर्ष सौंपने को भी कहा था.

महान संघर्ष समिति के हरदयाल सिंह गोंड ने कहा कि, अचानक से इस तरह का छापा सवाल उठाती है कि क्या ऐसा हमारे जबलपुर हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका की प्रतिक्रिया में पुलिस यह सब कर रही है. पुलिस फर्जी एफआईआर पर कुछ नहीं कर रही है लेकिन हमारे उपर कार्रवायी करके हमारे संचार माध्यमों को जब्त करने में तुरंत आ जाती है.
महान संघर्ष समिति और ग्रीनपीस मांग करती है कि इस कार्रवायी पर पुलिस अपना स्पष्टीकरण दे और इस तरह के कार्रवायी से वन सत्याग्रह रुकने वाला नहीं है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.