/बेंगलुरु में छह साल की बच्ची के साथ रेप नहीं बल्कि गैंगरेप..

बेंगलुरु में छह साल की बच्ची के साथ रेप नहीं बल्कि गैंगरेप..

बेंगलुरु में 6 साल की बच्ची के साथ एक पब्लिक स्कूल में हुए रेप केस में नया मोड़ आ गया है. पुलिस ने इस मामले में दो जिम प्रशिक्षकों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का मानना है कि ये केस रेप नहीं बल्कि गैंगरेप का हो सकता है.r-scare

शहर के पुलिस आयुक्त एमएम रेड्डी ने बताया, ‘विबग्योर हाई स्कूल मामले में दो और लोगों की गिरफ्तारी के बाद रेप की शिकायत अब गैंगरेप का मामला बन गया है.’ रेप की यह घटना 2 जुलाई को हुई थी, लेकिन पुलिस के पास पीड़िता के माता-पिता द्वारा शिकायत 14 जुलाई को दर्ज कराई गई थी.

रेड्डी ने कहा कि दो आरोपियों- लाल गिरी और वसीम पाशा नामक जिम प्रशिक्षकों को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया और इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी (उसी अस्पताल के प्रबंधन या कर्मचारी द्वारा महिला के साथ यौनाचार, जिसमें महिला भर्ती है) के तहत मामला दर्ज किया गया. उन्होंने कहा कि इनके खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पोक्सो) की विभिन्न धाराएं भी लगाई गई हैं.

स्कूल के स्केटिंग प्रशिक्षक मुस्तफा और संस्थापक अध्यक्ष रुस्तम केरावाला के बाद इस मामले में हुई यह चौथी गिरफ्तारी है. उन्होंने कहा कि जांच से मुस्तफा की सीधी संलिप्तता नहीं दिख रही है. पुलिस ने उसे उस समय मौजूद सबूतों के आधार पर उपजे संदेह के तहत गिरफ्तार किया था. शुरुआत में, पुलिस ने मुस्तफा को ही मुख्य आरोपी बताया था.

रेड्डी ने कहा कि गिरी और पाशा की गिरफ्तारी के साथ बेंगलुरु पुलिस ने मामला सुलझा लिया है. इस मामले से जनता के भारी रोष पैदा हो गया था और इसके विरोध में कई प्रदर्शन भी किए गए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.