/अजय सिंह यादव ने भी मंझधार में छोड़ दिया हुड्डा को..

अजय सिंह यादव ने भी मंझधार में छोड़ दिया हुड्डा को..

चंडीगढ़, हरियाणा सरकार में बिजली, वन एवं पर्यावरण मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के समधी कैप्टन अजय सिंह यादव ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर विकास और नौकरियों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। छह बार विधायक चुने गए यादव ने बुधवार को हो रही राज्य मंत्रिमंडल की बैठक से एक दिन पहले इस्तीफे का बम फोड़ा है। कैप्टन का इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ, लेकिन उनके इस कदम ने प्रदेश की राजनीति खासकर कांग्रेस में हलचल पैदा कर दी है। इससे न केवल बीरेंद्र सिंह और कुमारी सैलजा की हुड्डा विरोधी मुहिम को बल मिला है, बल्कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा लग गया है।Capt-Ajay-Yadav-2

मुख्यमंत्री हुड्डा के साथी एक-एक कर उनका साथ छोड़ते जा रहे हैं। इससे न केवल विरोधी खेमा मजबूत हो रहा है, बल्कि अपनों का साथ छोड़ने से हुड्डा की परेशानियां भी बढ़ रही हैं। अजय सिंह यादव ने मुख्यमंत्री पर उन्हें सम्मान नहीं देने के भी गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना नेता बताते हुए उन्होंने हुड्डा पर तीखे वार किए। पार्टी में रहकर हुड्डा का विरोध करने वाले नेताओं की सूची में अब कैप्टन का नाम भी जुड़ गया है। अनदेखी से आहत कैप्टन यादव करीब तीन साल पहले भी मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहते थे। सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया था कि अगले तीन माह में उनके सम्मान को वापस लौटा दिया जाएगा। मगर लंबे इंतजार के बाद भी कैप्टन को जब यह लगा कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो उन्होंने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले धमाका कर दिया।

कैप्टन का इस्तीफा बड़े ही नियोजित ढंग से हुआ है। इस्तीफा देने से पहले उन्होंने प्रदेश प्रभारी डा. शकील अहमद और सह प्रभारी आशा कुमारी से भी मुलाकात की थी। दोनों ने कैप्टन को समझाया, लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। कैप्टन जब हुड्डा के पास अपना इस्तीफा लेकर पहुंचे, तब उन्होंने भी उन्हें समझाया। यहां तक कहा कि वे इस्तीफा स्वीकार नहीं करेंगे और फाड़कर फेंक देंगे, लेकिन कैप्टन नहीं माने। अपने इस कदम के बाद उन्होंने हुड्डा विरोधियों को एकजुट करने के संकेत दिए हैं। गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा कांग्रेस में रहकर लड़ाई लड़ रही हैं, जबकि बीरेंद्र सिंह का भाजपा में जाना लगभग पक्का हो गया है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, सांसद धर्मबीर सिंह, सांसद रमेश कौशिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा, पूर्व मंत्री मांगे राम गुप्ता, पूर्व मंत्री डॉ. महा सिंह, पूर्व मंत्री केएल शर्मा, पूर्व विधायक मूला राम, पूर्व विधायक रणबीर मंदौला और पूर्व विधायक कुलबीर बैनीवाल जैसे कद्दावर नेता भी हुड्डा का साथ छोड़ चुके हैं।

(जागरण)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.