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छवि सुधार के लिए रेलवे ने कसी कमर, कार्य व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद..

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यात्रियों की शिकायतों की बाढ़ के बीच भारतीय रेलवे ने निर्णय लिया है कि सभी रेल ज़ोन और डिवीज़नों को उनके प्रदर्शन, खास तौर से खाद्य और सफाई से जुड़े कार्यों के लिए रैंक प्रदान किया जायेगा. ये ग्रेडिंग सिस्टम यात्रियों के फीडबैक, शिकायतों ,एसएम्एस और इंटरैक्टिव वौइस् रिस्पांस सिस्टम आदि की सहायता से काम करेगा.maxresdefault

एक अधिकारी ने बताया-“इसके बाद ख़राब रेटिंग प्राप्त ज़ोन और डिवीज़न के अधिकारी चिन्हित किये जायेंगे और कार्यवाही की जाएगी. कार्यवाही का डर ज़िम्मेदार बना देता है और वो अधिकारी लापरवाही छोड़ कर अपने क्षेत्र की बेहतरी के लिए कदम उठाने पर मजबूर होंगे.”

यात्रा के दौरान दिए जाने वाले खानेपीने को ले कर भारी आलोचना और शिकायतों की वजह से रेलवे ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन के साथ अनुबंध 2010 में समाप्त कर दिया था. लेकिन इसके बाद भी नए ठेकेदारों की मनमानी और रेलवे की लापरवाही की वजह से यात्रा के बीच की कैटरिंग सर्विस हमेशा सवालों के घेरे में रही.

रेलवे की 264 यात्री ट्रेनें हैं जिनमें पैंट्री कार की व्यवस्था है और इस व्यवस्था को पूरा करने का ठेका सिर्फ 31 ठेकेदारों के पास है जो इस धंधे में अर्से से पाँव जमाये बैठे हैं. अनियमितता और क्वालिटी के साथसाथ ठेकों के बंटवारे में भाई भतीजावाद का भी आरोप लगता रहा है.

उम्मीद की जा रही है कि रेलवे के इस कदम से उक्त विसंगतियां दूर करने में मदद मिलेगी और साख ख़राब करने वाले दोषियों पर कार्यवाही की जा सकेगी. सूत्रों के अनुसार रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा सुधार को ले कर बहुत सख्त हो गए हैं और किसी भी कीमत पर यात्रियों की शिकायतों का निपटारा करने के मूड में हैं. ऐसे संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही है कि यात्रा के दौरान बड़ी और नामी कंपनियों के पैक्ड खाने की व्यवस्था भी लागू की जाये. अगर खाद्य व्यवस्था में मानकों, सफाई और क्वालिटी का ख्याल नहीं रखा जा रहा है तो वेंडर के विरुद्ध कार्यवाही भी जा सकती है और उनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द किये जा सकते हैं. सरकार रेलवे में थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था लाने के लिए भी विचार कर रही है.

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