/लाशों पर व्यापार की फ़िराक में अमेरिका..

लाशों पर व्यापार की फ़िराक में अमेरिका..

इजराइल और फिलिस्तीन की लड़ाई में अमेरिका की बन्दर बाँट देखने को मिली है. एक तरफ अमेरिका सयुंक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा समीति का स्थायी सदस्य होने के नातेimages (2) इस समस्या का सामाजिक और राजनैतिक हल निकालने का ढोंग कर रहा है वहीँ दूसरी तरफ इजराइल को हथियारों की सप्लाई कर के आर्थिक लाभ कमाने की व्यापारिक गतिविधियों में लिप्त हुआ जा रहा है. शुक्रवार को अमेरिकी कांग्रेस ने इजरायली डिफेंस फोर्स के मिसाइल स्टॉक के लिए 225 मिलियन डॉलर (तकरीबन 1300 करोड़ रुपए) पैकेज की मंजूरी दे दी. इस पैकेज के ज़रिये इजराइल फिलिस्तीन के विरुद्ध लड़ाई में इस्तेमाल करने के लिए आयरन डोम सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलें खरीदेगा. ये मिसाइलें राकेट को मार गिराने के काम आती हैं. पीछले चार हफ़्तों से चल रही इस लड़ाई में इन मिसाइलों का इजराइल को बहुत फायदा मिला है. कांग्रेस की मंज़ूरी के बाद ये बिल अब ओबामा के सामने पेश होगा जहां इसके तुरंत पास कर दिए  जाने की उम्मीद है.

वाइट हाउस में शुक्रवार को हुयी बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में ओबामा ने इजराइल का समर्थन करते हुए उसकी खुद का बचाव करने की नीति को सही ठहराया था. उन्होंने फिलिस्तीन में बेगुनाहों की मौत पर अफ़सोस तो जताया लेकिन ये साफ़ कर दिया कि अमरीका अपने हितों की वजह से फिलिस्तीन के विरुद्ध जंग में इजराइल का ही साथ देगा. इसके साथ ही उन्होंने हमास द्वारा कैद किये गए इसरायली सैनिकों की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसी हरकतें शांति की बहाली में रोड़े अटकाने का काम करती हैं. इजरायल डिफेंस फोर्स के 23 वर्षीय सेकंड लेफ्टिनेंट हदर गोल्डिन को  हमास आतंकी अगवा करके किसी सुरंग में ले गए हैं. अपहरण से पहले हुए संघर्ष में दो इजरायली सैनिकों की मौत भी हो गई. गौरतलब है कि साल 2006 में भी हमास ने इजरायल के एक सैनिक को अगवा किया था. 1,000 फ़लस्तीनी कैदियों के बदले उसे पांच साल बाद 2011 में रिहा किया गया था.

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