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यौन उत्पीड़न के मामलों की दुबारा जांच करेगी यूपी पुलिस..

By   /  August 2, 2014  /  No Comments

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक अंतरिम कमेटी बनाने का निर्णय लिया है जो कार्यस्थल पर महिला उत्पीडन की जांच करेगी. ये कमेटी कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीडन रोधी कानून जो कि अप्रैल २०१३ में पास  हुआ था, के अंतर्गत काम करेगी. इसलिए कार्यस्थल पर उत्पीडन के जितने भी केस अप्रैल २०१३ से इस साल जुलाई के मध्य दर्ज किये गए हैं वो इस कमेटी द्वारा अब नए सिरे से  दुबारा सुने जायेंगे और सभी बयान दुबारा दर्ज किये जायेंगे.

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कमेटी की स्थापना में अत्यधिक विलम्ब से इंकार करते हुए डीजीपी अनद लाल बनर्जी ने कहा कि उन्होंने मामला संज्ञान में आने के तुरंत बाद कार्यवाही की है और किसी भी प्रकार का विलम्ब नहीं हुआ है. इससे पहले एक छः सदस्यीय कमेटी इस तरह के मामलों की जांच करती थी. उस कमेटी को निरस्त कर दिया गया है और उसकी जगह एक चार सदस्यीय कमेटी लेगी जिसमें एडीजी सुतापा सान्याल,एडिशनल एसपी नित्यानंद राय, जो की डीजीपी के पीआरओ भी हैं, डीजीपी कार्यालय के कर्मचारी मिथिलेश वर्मा और स्वतंत्र एनजीओ सुरक्षा की सदस्य शालिनी माथुर शामिल हैं.

शालिनी के अनुसार निरस्त की गयी कमेटी सुप्रीम कोर्ट के 1997 के निर्णय और विशाखा गाइडलाइन्स के अनुसार काम कर रही थी. लेकिन वे सभी नियम पिछले वर्ष के अप्रैल माह तक ही लागू होते थे. इसलिए पुराने पुलिस अफसर अपने महिला सहयोगियों से दुर्व्यवहार के मामले में अब तक की कार्यवाही को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट जा सकते थे. इसलिए इस कमेटी का बनाया जाना आवश्यक था. इस निर्णय के अचानक आने की वजह मेरठ में महिला एसआई के साथ वहाँ के डीआईजी द्वारा बदसलूकी और यौन उत्पीडन के मामले के सामने आन बताया जाता है. कहा जा रहा है कि इस कमेटी के आभाव में आरोपी कानूनी कमजोरियों का फायदा उठा सकते थे.

 

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  • Published: 3 years ago on August 2, 2014
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  • Last Modified: August 2, 2014 @ 9:54 pm
  • Filed Under: अपराध

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