कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

यौन उत्पीड़न के मामलों की दुबारा जांच करेगी यूपी पुलिस..

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक अंतरिम कमेटी बनाने का निर्णय लिया है जो कार्यस्थल पर महिला उत्पीडन की जांच करेगी. ये कमेटी कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीडन रोधी कानून जो कि अप्रैल २०१३ में पास  हुआ था, के अंतर्गत काम करेगी. इसलिए कार्यस्थल पर उत्पीडन के जितने भी केस अप्रैल २०१३ से इस साल जुलाई के मध्य दर्ज किये गए हैं वो इस कमेटी द्वारा अब नए सिरे से  दुबारा सुने जायेंगे और सभी बयान दुबारा दर्ज किये जायेंगे.

images

कमेटी की स्थापना में अत्यधिक विलम्ब से इंकार करते हुए डीजीपी अनद लाल बनर्जी ने कहा कि उन्होंने मामला संज्ञान में आने के तुरंत बाद कार्यवाही की है और किसी भी प्रकार का विलम्ब नहीं हुआ है. इससे पहले एक छः सदस्यीय कमेटी इस तरह के मामलों की जांच करती थी. उस कमेटी को निरस्त कर दिया गया है और उसकी जगह एक चार सदस्यीय कमेटी लेगी जिसमें एडीजी सुतापा सान्याल,एडिशनल एसपी नित्यानंद राय, जो की डीजीपी के पीआरओ भी हैं, डीजीपी कार्यालय के कर्मचारी मिथिलेश वर्मा और स्वतंत्र एनजीओ सुरक्षा की सदस्य शालिनी माथुर शामिल हैं.

शालिनी के अनुसार निरस्त की गयी कमेटी सुप्रीम कोर्ट के 1997 के निर्णय और विशाखा गाइडलाइन्स के अनुसार काम कर रही थी. लेकिन वे सभी नियम पिछले वर्ष के अप्रैल माह तक ही लागू होते थे. इसलिए पुराने पुलिस अफसर अपने महिला सहयोगियों से दुर्व्यवहार के मामले में अब तक की कार्यवाही को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट जा सकते थे. इसलिए इस कमेटी का बनाया जाना आवश्यक था. इस निर्णय के अचानक आने की वजह मेरठ में महिला एसआई के साथ वहाँ के डीआईजी द्वारा बदसलूकी और यौन उत्पीडन के मामले के सामने आन बताया जाता है. कहा जा रहा है कि इस कमेटी के आभाव में आरोपी कानूनी कमजोरियों का फायदा उठा सकते थे.

 

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: