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मार्कन्डेय काटजू ने दवे के गीता और महाभारत पढ़ाने के बयान पर आपत्ति जताई..

By   /  August 3, 2014  /  No Comments

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भारतीय प्रेस परिषद(पीसीआई) के अध्‍यक्ष मार्कन्डेय काटजू ने आज उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ए के दवे के गीता और महाभारत संबंधी बयान को लेकर आपत्ति जताई है. उन्‍होंने इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे तथा संविधान के खिलाफ बताया.उन्होंने कहा कि इससे देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को गहरा नुकसान होगा.katjoo2

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए आर दवे ने कल कथित तौर पर कहा था कि भारतीयों को अपनी प्राचीन परंपराओं की ओर लौटना चाहिए तथा बच्चों को शुरुआती अवस्था से ही महाभारत तथा भगवद् गीता जैसे ग्रंथ पढाये जाने चाहिए.

उन्होंने अहमदाबाद में कथित तौर पर बयान दिया था कि ‘अगर मैं भारत का तानाशाह होता तो मैं पहली कक्षा से ही गीता और महाभारत पढाना लागू करता. इस तरीके से आप सीखते कि जीवन कैसे जीना है.अगर कोई कहता है कि मैं धर्मनिरपेक्ष हूं या मैं धर्म निरपेक्ष नहीं हूं तो मैं माफी चाहूंगा.कहीं भी कोई भी बात अगर अच्छी हो तो हमें उसे ग्रहण करना चाहिए’.

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश काटजू ने आज इससे असहमति जताते हुए कहा ‘मैं न्यायमूर्ति दवे के इस बयान से पूरी तरह असहमत हूं कि गीता और महाभारत स्कूलों में अनिवार्य की जाननी चाहिए.

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  • Published: 3 years ago on August 3, 2014
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  • Last Modified: August 3, 2014 @ 4:32 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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