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भोले बाबा, आपको खुश करने के लिए ‘हरिप्रिया’ ने काटी जीभ..

By   /  August 4, 2014  /  1 Comment

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-प्रतीक चौहान||
रायपुर, सावन का महीना, और आज उस महीने का अंतिम सोमवार। पूरे देश में जहां भोले बाबा को खुश करने के लिए उनके भक्त जलाभिषेक कर उन्हें खुश कर रहे है। वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की एक युवती ने भोले बाबा को खुश करने के लिए अपनी जीभ की बली चढ़ा दी। उन्नीस वर्षीया युवती का नाम हरिप्रिया चौहान है. unnamed (1)

रायगढ़ के दीनदयाल कॉलोनी निवासी के परिजनों का कहना है कि सुबह बिना किसी को बताए वह घर से शिव मंदिर के लिए निकल गई । मंदिर में भगवान शिव की पूजा अर्चना के बाद अचनाक उसने ब्लेड से अपनी जीभ काट ली और शिवलिंग में चढ़ा दी।

यह बात फैलते ही उस युवती को देखने के लिए गांव वालों की भीड़ लग गई। मंदिर में मौजूद लोगों का कहना है कि मंदिर पहुंच कर हरिप्रिया ने सबसे पहले पूरे विधि विधान से पूजा की। पूजा करने के बाद उसने ब्लेड से अपनी जीभ काट ली और शिवलिंग पर चढ़ा दी। जीभ चढाने के बाद के बाद वह शिवलिंग के सामने बैठ गई।

कुछ देर तक पूजा करने आए भक्तों को पता ही नहीं चला कि युवती ने अपनी जीभ काट कर शिवलिंग में चढ़ा दी है। युवती के पिता राम लाल चौहान का कहना है कि जब वह छोटी थी तभी से मंदिर में भगवान शिव की पूजा किया करती आ रही है। इसका ध्यान पढ़ाई में कम पूजा पाठ में ज्यादा लगा रहता है। इसी के चलते सातवीं तक पढ़ाई करने के बाद आगे की बढ़ाई बंद कर दी।

अभी युवती को रायगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि युवती अपने परिजनों से ठीक ढ़ंग से बात नहीं कर रही है। हालांकि डॉक्टरों को उसने जांच करने में सहयोग दिया। युवती की हालत खतरे से बाहर बताइ जा रही है।

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  • Published: 3 years ago on August 4, 2014
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  • Last Modified: August 4, 2014 @ 6:46 pm
  • Filed Under: धर्म

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. क्या कहेंगे इसे भक्ति या विश्वास ?आस्था में इंसान अंजाम को भूल जाता है

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