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नीतीश कुमार ने ग्रीनपीस के सोलर माइक्रो ग्रिड को माना ऊर्जा का विकास माॅडल

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पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने ग्रीनपीस द्वारा धरनई में स्थापित सोलर माइक्रो ग्रिड पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वह ग्रामीण विद्युतीकरण की दिशा में ऐसेDSC_1595 प्रयासों का पुरजोर समर्थन करते हंै। श्री नीतीश कुंमार ने आज जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड में स्थित सौर ऊर्जा ग्राम धरनई में स्थापित बिहार के इकलौते सोलर माइक्रो ग्रिड प्रणाली का भ्रमण किया। गांव व चैक-चैराहों पर शाम व रात में सोलर माइक्रो ग्रिड की बिजली से रोशन घरों, दुकानों तथा सार्वजनिक भवनों को देख कर उन्होंने ग्रीनपीस के प्रयासों की सराहना की और बिहार में बिजली संकट और ऊर्जा निर्धनता से निबटने के लिए ऐसे उपायों को अपनाने पर बल दिया।  
यहां उल्लेखनीय है कि गत 16 मई, 2012 को ग्रीनपीस इंडिया और तब मुख्यमंत्री पद को सुशोभित कर रहे श्री नीतीश कुमार के बीच बैठक के दौरान स्वयं श्री कुमार ने ग्रीनपीस को पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर एक ऐसे व्यावहारिक माइक्रो ग्रिड ऊर्जा प्रणाली को प्रदर्शित करने को कहा था, जिसे सरकार समूचे राज्य में लागू करने को इच्छुक हो सके। 
ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर (अक्षय ऊर्जा) मनीष राम ने इस मौके पर बताया कि ‘हमारे देश में लाखों यूनिट बिजली का रोजाना उत्पादन होता है, पर यह बिहार जैसे गरीब राज्यों के गांव-देहातों व शहरों तक नहीं पहंुच बना पाती, क्योंकि ये देश की ऊर्जा अधिसरंचना या नेशनल ग्रिड से जुड़े हुए नहीं हैं। इसी ऊर्जा असमानता व अन्याय को खत्म करने के लिए ग्रीनपीस ने बिहार सरकार के समक्ष इस बात की पैरोकारी की थी कि वह केवल केंद्रीकृत विद्युत आपूर्ति अधिसंरचना पर ही निर्भर न रहे, बल्कि अपने बूते स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल करते हुए छोटे यानी गांव स्तर पर अपनी बिजली पैदा करे। गत दो सालों से बिहार सरकार, खासकर श्री नीतीश कुमार, के सक्रिय सहयोग व गंठबंधन के बाद ग्रीनपीस ने एक ऐसे माइक्रो ग्रिड को स्थापित करने का वायदा पूरा कर दिखाया है, जो समूचे गांव को स्वच्छ व सुलभ बिजली उपलब्ध करा रहा है।’ DSC_1565
गौरतलब है कि धरनई में विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा माॅडल के तहत 100 किलोवाट क्षमता की एक सोलर माइक्रो ग्रिड प्रणाली स्थापित हुई है, जो करीब 450 घर-परिवारों तथा 50 दुकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चैबीसों घंटे और सातों दिन किफायती बिजली सुविधा उपलब्ध करा रही है। महज 3 करोड़ की लागत से बने इस माइका्रे ग्रिड से 60 स्ट्रीट लाइट, दो स्कूल, एक स्वास्थ्य केंद्र और एक किसान प्रशिक्षण केंद्र में भी बिजली की आपूर्ति की जा रही है। यही नहीं, खेतों में सिंचाई के लिए 10 सोलर पंप के जरिये बिजली भी मुहैया करायी जानी है, जिसमें से अभी दो सोलर पंप से सिंचाई हो रही है।
धरनई में इस सार्वजनिक समारोह के दौरान ‘आद्री’ के सचिव व प्रख्यात अर्थशास्त्री डाॅ. शैबाल गुप्ता ने कहा कि ‘यह देखना वाकई उत्साहजनक है कि ग्रीनपीस ने एक माइक्रो ग्रिड की सफलतापूर्वक स्थापना कर अक्षय ऊर्जा की व्यावहारिकता को प्रमाण सहित प्रदर्शित कर दिखाया है, जो पूरे गांव को स्वच्छ बिजली मुहैया करा रहा है। निश्चय ही यह बिहार राज्य के एनर्जी सेक्टर में नये परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।’
श्री मनीष राम ने आगे बताया कि ‘हम बिहार सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह अपने वायदे के अनुरूप अब इस माॅडल का अनुसरण करते हुए पूरे राज्य में लागू करेगी, ताकि बिजलीविहीन लोगों तक इसकी निरंतर DSC_1399उपलब्धता हो तथा स्वच्छ ऊर्जा के जरिये राज्य को सततशील विकास के रास्ते पर ले जाया जा सके।’

देश के सबसे उपजाऊ इलाकों में से एक और विशाल श्रमसंपदा के साथ बिहार के पास बढि़या मौका है कि वह देश में कृषि व औद्योगिक विकास का अगला नया केंद्र के बतौर उभरे। हालांकि एक महत्वपूर्ण मसले के रूप में बिजली की कमी राज्य के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा बन गयी है। उम्मीद है कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के धरनई दौरे के बाद राज्य सरकार ऐसे माॅडल को अपनाने के प्रति अपना संकल्प और इच्छाशक्ति दोहराने को प्रेरित होगी और निश्चय ही यह बिहार को तेजी से ऊर्जा संकट से उबारने में मददगार साबित होगी।

धरनई माइक्रो ग्रिड: महज दो सालों में अंधेरे से रोशनी की ओर सफर की कहानी
15 मई, 2012    बिहार के तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्री बृजेंद्र प्रसाद यादव ने ग्रीनपीस की रिपोर्ट ‘एनर्जी रिवोल्युशन इन बिहार: द रिन्युबल एनर्जी वे’ जारी की, जिसमें बिहार में विकेंद्रीकृत व वितरित अक्षय ऊर्जा माइक्रो ग्रिड की व्यावहारिकता व संभावना का ठोस नजरिया पेश किया गया था।
16 मई, 2012    तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से ग्रीनपीस के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की। श्री कुमार ने प्रायोगिक आधार पर एक सोलर माइक्रो ग्रिड स्थापित और प्रदर्शित करने का सुझाव दिया, ताकि इसका पूरे बिहार राज्य में अनुकरण किया जा सके।
18 मई, 2012    मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अपने कैबिनेट की एक उच्च स्तरीय बैठक की और कहा कि बिहार की बिजली व ऊर्जा जरूरतों को केवल सौर ऊर्जा, DSC_1349बायोमास और धान की भूसी आदि अक्षय संसाधन तरीकों से ही पूरा किया जा सकता है।
23 सितंबर, 2013    ग्रीनपीस ने बिहार सरकार के समक्ष राज्य में अक्षय ऊर्जा के तीव्र विकास के लिए जरूरी वैधानिक, नीतिगत और नियामकीय मसौदों का पड़ताल करती एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की।
18 अक्तूबर 2013    श्री नीतीश कुमार की पहल व सुझाव का अनुकरण कर ग्रीनपीस ने जहानाबाद जिला के मखदुमपुर प्रखंड में स्थित धरनई राजस्व ग्राम का विविध मानकों के आधार पर चुनाव कर वहां एक सोलर माइक्रो ग्रिड की नींव रखी।
12 मार्च, 2014    माइक्रो ग्रिड का काम पूरा हुआ। गांव में तीन दशकों के बाद पहली बार बिजली की आपूर्ति शुरू हो गयी।
20 जुलाई, 2014     ग्रीनपीस ने औपचारिक रूप से सोलर माइक्रो ग्रिड की शुरूआत की। इस दिन करीब 3,000 से अधिक लोगों ने सक्रिय भागीदारी की।

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