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रिलायंस पर 13 करोड़ का जुरमाना..

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड इंडिया (SEBI) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर तेरह करोड़ का जुरमाना लगाया है. यह जुरमाना कंपनी द्वारा लाभ अनुपात रिपोर्ट जरी न sebi-reliance956किये जाने के आरोप को सही पाए जाए पर कार्यवाही करते हुए लगाया. यह आंकड़ा कंपनी की रपट का महत्वपूर्ण अंश माना जाता है और बाजार में कंपनी का शेयर चढ़ाने के समझौते के तहत इसकी नियनित जानकारी देना जरूरी है.

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सात साल पुराने मामले में जांच के बाद यह आदेश दिया है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की तरफ से ये अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्यवाही है. रिलायंस पर सूचीबद्धता के समझौते का उल्लंघन करने का भी आरोप है. बोर्ड ने सात साल पुराने मामले में जांच के बाद आरोप सही पाए जाने के बाद ये निर्णय दिया. यह मामला मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायसं इंडस्ट्रीज द्वारा अपने प्रवर्तकों को 12 करोड़ वारंट जारी करने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. यह कहा गया था कि अप्रैल 2007 में इस निर्गम के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की निर्गम पूर्व चुकता इक्विटी
शेयर पूंजी का अनुपात कम हो गया था, लेकिन कंपनी लगातार लगभग छह तिमाही तक प्रति शेयर लाभ के अनुपात की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी.

15 पृष्ठ लम्बे अपने आदेश में नियामक बोर्ड ने कहा है कि इसके बाद सेबी ने त्रमासिक व सालाना खुलासे में प्रति शेयर लाभ (डीईपीएस) की जानकारी शेयर बाजारों को नहीं करने आरोप में उसके खिलाफ सूचीबद्धता समझौते तथा प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) कानून (एससीआरए) के कथित उल्लंघन पर अधिनिर्णायक कार्रवाई शुरू की.
सेबी ने पीछले वर्ष रिलायंस को कारण बताओ नोटिस जारी किया था जिसमें कंपनी से अनियमितताओं के बारे में जवाब माँगा गया था.

 

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