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ट्विटर को मात देने के लिए एप्प लांच किया फेसबुक ने..

By   /  August 9, 2014  /  No Comments

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फेसबुक ने ट्विटर की बढ़ती लोकप्रियता पर लगाम लगाने के लिए एक नया ऐप जारी किया है. इसके जरिये कंपनी वीआईपी और सेलिब्रिटीज को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करेगी. उसकी कोशिश है कि उनके फैन्स के लिए यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म बने.facebook-twitter-logo__large

फेसबुक के दुनिया भर में 132 अरब यूजर हैं और उसमें से करीब 80 करोड़ ने वीआईपी जैसे लोगों से संपर्क साध रखा है. फेसबुक का यह नया ऐप उन हाई प्रोफाइल ऐक्टरों, खिलाड़ियों, म्यूजिशियन्स और अन्य प्रभावशाली लोगों के लिए है. इन नामी गिरामी लोगों के फैन्स अरबों संदेश भेजते हैं.

यह ऐप अभी आईफोन के यूजर्स के लिए है और यह सोशल मीडिया पोस्टिंग तथा कमेंट करने के तरीके को सरल बनाता है. यह बिल्कुल आसान है. दरअसल इसका मकसद भी यही है कि सोशल मीडिया के शौकीनों, प्रभावशाली लोगों को ट्रेंड कर रहे टॉपिक्स से जोड़ा जाए या उनके संदेश को तेजी से फैलाया जाए.

हालांकि ट्विटर फेसबुक के मुकाबले एक छोटा प्लेटफॉर्म है लेकिन सोशल मीडिया में अपनी बात फैलाने के लिए यह एक बेहद असरदार माध्यम है. सत्ता में बैठे लोग लंबे समय से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी बातें आसानी से दूर तक फैल रही हैं. ट्विटर पर अपनी बात कहना किसी भी सेलिब्रेटी के लिए आसान है.

इस नए ऐप में ट्रेंड कर रहे टॉपिक को ट्रैक करना और फैन्स के साथ सवाल-जवाब सेशन कॉर्पोरेट, मीडिया या ब्रांड टीमों के लिए दिलचस्पी का विषय हो रहा है. लेकिन फिलहाल फेसबुक चुनींदा लोगों तक ही पहुंच रहा है. वह उन्हें अपने यहां आमंत्रित कर रहा है.

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  • Published: 3 years ago on August 9, 2014
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  • Last Modified: August 9, 2014 @ 3:27 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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