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फेसबुक पर प्रकट भये परमपिता परमेश्वर..

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ये इन्टरनेट की दुनिया है बाबूसाहब. यहाँ वो सब कुछ संभव है जिसकी कल्पना भी आप आम जीवन में नहीं कर सकते. मसलन आप असल जीवन में भगवान को सिर्फ याद कर सकते हैं. अधिक से अधिक आप उनकी तस्वीर निहार सकते हैं और इनके सामने हाथ जोड़ कर अपने दुःख सुख सुना सकते हैं. उनकी पूजा अर्चना कर के उन्हें खुश करने की कल्पना कर सकते हैं. लेकिन इस इन्टरनेट की दुनिया में इसके आगे की भी सोच ली गयी है. जी हाँ.. इन्टरनेट पर स्वयं परमपिता परमेश्वर  प्रकट हो चुके हैं.

pरमपिता परमेश्वर

फेसबुक पर अभी हाल ही में प्रकट हुयी इस आई डी का नाम है परमपिता परमेश्वर, जो खुद के काल्पनिक भगवान होने की बात कहता है. इस आई डी के फेसबुक पटल पर आते ही तेज़ी से इसके मित्रों और फॉलो करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है. लोग तरह तरह के सवाल करते हुए इनकी वाल पर पोस्ट कर रहे हैं. खुद परमपिता परमेश्वर भी समसामायिक विषयों पर अपनी राय बेबाकी से दे रहे हैं.

खुद को प्रतापगढ़ का मूल निवासी बताने वाले और फ़िलहाल  नई दिल्ली में रहने वाले परमपिता की पढाई कानपूर विश्वविद्यालय से हुयी है. अपनी पोस्ट्स में भक्ति को ले कर मजाकिया लहजे में लिखने वाले परमपिता परमेश्वर की पोस्ट्स का ध्यान भक्ति के नाम पर कॉमन सेंस रहित व्यवहार को ख़त्म करने पर रहता है. एक पोस्ट में वे लिखते हैं, “भक्तों, अगर आपका मजहब आपके जीवन में इतना महत्वपूर्ण है कि इसके लिए आप किसी की जान भी ले सकते हैं तो कृपया शुरुआत अपने आप से करें !”परमपिता परमेश्वर

वहीँ दूसरी तरफ़ अपने किसी दिव्या शक्ति से लैस होने की बात से इंकार करते हुए ये भी बताते हैं कि लोगों को विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए. यहाँ वे लिखते हैं, “पिछले दो दिन में करीब 300 से ज्यादा लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी. मैंने विचित्र कैरेक्टर्स को छोड़कर अधिकतर की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली. इन सभी नए मित्रों को सूचित कर देना चाहता हूँ कि मै मूलतः नास्तिक हूँ और मेरा किसी ईश्वर में कोई यकीन नहीं। इस फेसबुकिया रंगमंच पर मै काल्पनिक भगवान का चरित्र अदा कर रहा हूँ, जो मुख्यतः एंटरटेनमेंट के उद्देश्य से है. अगर इससे किसी की भावनायें आहत होती हैं तो वो अपनी भावनाओं की गठरी समेट कर मेरी मित्रता सूची से प्रस्थान कर सकता है. इसके साथ ही पोस्ट पर कमेंट करने वालों से यथोचित ‘सेन्स ऑफ़ ह्यूमर’ रखने की उम्मीद करता हूँ. जबरदस्ती का ज्ञान देने वाले क्षमा करें !”1  परमपिता परमेश्वर

इनकी एक मित्र दीप सन्देश इनकी वाल पर अपनी एक समस्या का समाधान चाहती हैं. दीप लिखती हैं, “ प्रभु, मेरी दादी माँ पूछ रही थी कि स्वर्ग में साड़ी की सेल लगती है या नहीं. प्लीज जल्दी बताइयेगा. दादी माँ का कोई भरोसा नहीं है.”

इसी तरह कई अन्य मित्रों ने भी मजाकिया लहजे में गंभीर मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे हैं. ज़ारा खान पूछती हैं-“ हे परमपिता, जब से आपने अपने एजेंटों की फ्रैंचाइज़ी को ख़त्म कर के ये डायरेक्ट डायलिंग सेवा शुरू की है, हम जैसे जिज्ञासुओं को बड़ी सुविधा हो गई है. आपके एजेंट तो कभी सीधे जवाब देते नहीं. अब से हम अपने आड़े-टेढ़े सवाल सीधे आप से ही किया करेंगे. तो इस कड़ी मे हमारा पहला सवाल ये रहा….
“ये जो शिर्डी, तिरुपति, अजमेर आदि आदि जगहों पर करोड़ों-अरबों रुपयों का चढ़ावा चढ़ता है इसमें से कितना आपके पास पहुँचता है? कुछ पहुँचता भी है या………???”

खुद परमपिता भी चुटकी लेने से नहीं चूकते और कहते हैं “सोच रहा हूँ भूमध्य सागर को थोडा और एक्सपेंड करके इजराइल, सीरिया और ईराक को समुंदर के अंदर कर दूँ। ये कबीले शांतिपूर्वक रहना ही नही जानते !”

भक्तों की अजीबो गरीब भक्ति पर टिपण्णी करते हुए लिखते हैं-“ दुखद, किन्तु सत्य- मेरे भक्तोँ मेँ मैजोरिटी मूर्खो की है !”  देवताओं के पारंपरिक रूप पर चुटकी लेते हुए एक स्टेटस में इन्होने लिखा –“ जब मै विष्णु के रूप में होता हूँ तो चार हाथ होने के कारण मुझे टी-शर्ट पहनने में बहुत दिक्कत होती है !”

ऐसे ही अनेक स्टेटस और कमेंट्स से भरा हुआ है इनका दरबार. बहरहाल, इनके बारे में फ़िलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि ये एक रोचक पहल है अपने आस पास से धर्म से जुड़े अंधविश्वास कम करने की. चाहे तो आप भी इनके भक्त बन सकते हैं. बस एक अदद फेसबुक अकाउंट की आवश्यकता है.

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