कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

पेड़ों के राखी बांधकर जंगल बचाने का लिया संकल्प..

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

भारी बारिश के बावजूद राखी महोत्सव में सैंकड़ों ग्रामीणों की उमड़ी भीड़…

सिंगरौली, रक्षा बंधन के दिन महान वन क्षेत्र के ग्रामीणों ने जंगल में महुआ पेड़ को राखी बाँधकर अपने जंगल के साथ रिश्ते को नया आयाम दिया. दिल्ली, बंगलोर, मुंबई सहित 10 शहरों से भेजी गयी करीब 9000 राखी को महुआ पेड़ में बांधकर ग्रामीणों ने महान वन क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान से अपने जंगल को बचाने का संकल्प लिया. सुबह से भारी बारिश के बावजूद राखी महोत्सव में भाग लेने वाले ग्रामीणों का उत्साह चरम पर था. करीब दो दर्जन गांवों के एक हजार से अधिक ग्रामीणों ने पेड़ को राखी बांधी, इनमें भारी संख्या में महिलाएँ भी थी.10599677_256576671208073_2547808948646910432_n

भाई द्वारा बहन की रक्षा करने का संकल्प लेने वाले रक्षा बंधन के उत्सव को नया अर्थ देते हुए मुंबईकरों ने प्रस्तावित खदान से प्रभावित होने वाले 54 गांवों के प्रतीक के रुप में 54 फीट लंबी राखी तैयार की थी.

बिहार के धरनई गांव के 400 घरों और स्कूलों से ग्रामीणों ने 1000 राखी जुटाकर महान के ग्रामीणों के लिए भेजा था, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे उनका घर बिना कोयले के बिजली से रौशन हुआ. ग्रीनपीस ने मार्च 2014 में बिहार के इस गांव को गोद लिया था जहां आज सौर ऊर्जा के सहारे 450 घरों, 50 दुकानों और 60 सड़क लैम्प को बिजली मिलना संभव हो सका है.

मुंबई की आफरीन अली ने कहा, “भले ही मैं शहर में रहती हूं लेकिन मैं अपने जंगल को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों से भावात्मक लगाव महसूस करती हूं. ये लोग सिर्फ अपने जंगल को बचाने के लिए नहीं लड़ रहे बल्कि हमें बेहतर दुनिया देने के लिए भी ये संघर्ष कर रहे हैं. आज का कार्यक्रम एक रचानात्मक तरीका है जिससे महान के लोगों की स्थिति के बारे में लोगों को बताया जा सके और 9 हजार राखी इस बात को दिखाता है कि हर आदमी शारीरीक रुप से इस संघर्ष में शामिल है”.

ग्रामीणों ने राखी को महुआ के पेड़ में बांधा क्योंकि यह पेड़ जंगलवासियों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. ग्रामीणों के आर्थिक आधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महुए को बाजार में बेचकर पैसे कमाए जाते हैं और दूसरे कई कामों में भी महुए का महत्व है.10367795_256576777874729_2778822155083416203_n

महान में प्रस्तावित कोयला खदान से प्रभावित होने वाले गाँव बुधेरी की रहने वाली अनिता कुशवाहा विशेष उत्साहित हैं. वे बताती हैं कि मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आज पूरे देश से लोग उनके जंगल बचाने की लड़ाई में शामिल हो गए हैं. बड़ी संख्या में शहरों से आयी राखियों को देखकर हमारा मन भावुक हो गया है. हमें लगता है कि शहरों में भी ऐसे लोग बचे हुए हैं जो जंगलों और पर्यावरण को बचाने की कोशिश करना चाहते हैं. इससे हमारी लड़ाई को एक नयी ऊर्जा मिली है.

महान का प्राचीन जंगल करीब एक हजार हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें लगभग 50 हजार से अधिक गांव वालों की जीविका निर्भर है. इस जंगल पर महान कोल लिमिटेड (एस्सार व हिंडाल्को का संयुक्त उपक्रम) को प्रस्तावित कोयला खदान से इन गांव वालों की जीविका खतरे में पड़ गयी है.10534111_256576691208071_9216674627220981579_n

ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर और महान संघर्ष समिति की सदस्य प्रिया पिल्लई ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से हमलोग कई चीजों से लड़ रहे हैं, हमारी अवैध गिरफ्तारी हुई, कंपनी के गुंडे लगातार हमें रोकने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही कई ऐसे प्रयास हुए जिससे राखी महोत्सव के दौरान हिंसा भड़क सके लेकिन यह देखने की बात है कि कैसे शांतिपूर्ण तरीके से लोगों ने राखी का उत्सव मनाया है. ग्रामीणों ने एक मजबूत संदेश दिया है कि कुछ भी हो उनको आगामी ग्राम सभा से पहले डराया-धमकाया नहीं जा सकता है.

आगामी हफ्तों में अमिलिया में ग्राम सभा का आयोजन होना है जिसमें लोगों से एस्सार व हिंडाल्को को प्रस्तावित कोयला खदान पर उनकी राय ली जाएगी. 6 मार्च 2013 को हुए फर्जी ग्राम सभा जिसके आधार पर महान कोल ब्लॉक को दूसरे चरण की मंजूरी दी गयी के गलत साबित होने के बाद जिला कलेक्टर सिंगरौली ने नया ग्राम सभा करवाने की घोषणा की थी. तीसरे हफ्ते में आयोजित होने वाले ग्राम सभा से पहले कई तरह की विसंगतियां हैं जिसे दूर करने की जरुरत है.

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: