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प्रधानमंत्री सडक़ योजना में हुये घोटाले का आरटीआई में हुआ खुलासा..

By   /  August 12, 2014  /  1 Comment

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-रमेश सर्राफ धमोरा||
झुंझुनू, जिले के बुहाना क्षेत्र में केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री सडक़ योजना में एक बड़ा घोटाला सामने आया है. आरटीआई के द्वारा मांगी गयी एक सूचना में सडक़ निर्माण में पीडब्लुडी के अधिकारीयों का घोटाला सामने आया है. नेताओ, ठेकेदारों व पीडब्लुडी के अधिकारियों ने मिलकर ग्रामीणो की आखो में धूल झोकते हुए सरकार को लाखो का चूना लगा दिया. पचेरी गांव से नाया वाली ढाणी तक दो किलोमीटर की सडक़ का निर्माण होना था लेकिन उस सडक़ को बीच में खुर्दर्बुद करके उस सडक़ की लाखो में लगी लागत को उठा लिया और ग्रामीण ठगे से देखते रह गये. दुसरी तरफ नक्शे में बना ढाणी में जाने वाला एकमात्र रास्ते पर दबंगो ने अतिक्रमण करके रास्ते को रोक दिया. अब सिर्फ जाने के लिए बची है एक पगडंडी.11-08-14 narender swami (1)

बुहाना उपखण्ड के पचेरी कलां ग्राम पंचायत के नाईयों की ढाणी वासियों के लिए घर से निकलने का भले ही रास्ता न हो लेकिन कागजों में शानदार डामरीकृत सडक़ बनी हुई है. आरटीआई से प्राप्त सूचना के आधार पर पचेरी कलां से नाईयो की ढाणी तक दो किलोमीटर पक्की डामरीकृत सडक़ बनी हुई है. जो झुंझुनू- दिल्ली सडक़ मार्ग से जोड़ी हुई है. जिसके निर्माण में 52.66 लाख रूपये की लागत लगी हुई है. जबकि सूचना में इस सडक़ की स्वीकृत राशि 51.11 लाख ही बताई गई है. ताजूब की बात तो यह है, कि इस सडक़ निर्माण को लेकर स्थानीय नेताओं ने अपने वोट बैंक को बनाने के लिए बड़े कसीद कसे थे. परन्तु सच्चाई यह है कि जिन लोगों के लिए यह सडक़ बनने की बातें कहीं जा रही है. उनको घर से बाहर निकलने के लिए पगडंडी के अलावा कोई रास्ता तक नही है.

सडक़ स्वीकृति के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग के साथ ठेकेदारों ने नेताओं से जुगाड़ बिठाकर एवं सांठगांठ कर रास्ते के बीच में पडऩे वाली नावता की ढ़ाणी के इर्दगिर्द प्रभावशाली लोगों के प्रभाव से अन्य रास्तों पर घुमाकर सडक़ के बजट को डकार लिया जिसकी अभी तक किसीको भनक तक नहीं लगने दी. लेकिन आरटीआई से मांगी सूचना ने मामले की पोल खोल दी है. सडक़ स्वीकृति के समय लगाये गये नक्शे को बदलकर नये सिरे से सडक़ का निर्माण कर दिया. जो सडक़ किसी भी तरह से नाईयों की ढाणी को नहीं जोड़ती है. आरटीआई की सूचना के बाद सच्चाई सामने आने के बाद ढाणीवासी ग्रामीण भी लांमबंध होने लगे है.

ग्रामीणों ने झांसा देने वाले नेता व ठेकेदार तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ढाणी में करीब दो सौ लोगो की आबादी है. कुछ लोग साधन सम्पन्न भी है. लेकिल घर से बाहर निकलने का रास्ता नहीं. खाली खेतों में से तो जैसे तैसे आ जा सकते थे. लेकिन फसल बुआई के बाद घर से बाहर निकलते ही पगडंडी पर चलते समय जरा सा कदम डिग गये तो गालिया शुरू हो जाती है. ऐसे में ग्रामीणो का जीना हराम हो गया है. इसके लिए प्रशासन को कई बार गुहार लगा चुके है. नक्से में रास्ता एवं कागजों में 52 लाख रूपये की सडक़ मौजूद है लेकिन सच्चाई ये है कि अतिक्रमण होने की बजह से ढाणी में जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है.

ग्रामीणों ने बताया कि नाईयों की ढाणी के आबाद होने से पहले ही यह रास्ता निंबू वाले जोहड़ से लेकर भंभू वाले जोहड़ के चारागाह में गायों के चरने जाने के लिए छोडा गया रास्ता था. जो बहुत पुराना है. अभी भंभू वाली जोहडी को तोडकर काश्त की भूमि में बदला जा चुका है. जोहड़़ का तलहटी पर भी अतिक्रमण हो चुका है. साथ ही में इसी के साथ छोड़े गये रास्ते पर अतिक्रमण कर लिया गया. यह रास्ता पैमाईस के समय भी स्वीकृत एवं कटान का रिकोर्ड भी है. जिस पर बाहुबलियों ने अतिक्रमण कर रोक दिया हैं . अतिक्रमण आज तक बरकरार है. जिसका मुकदका करीब बीस साल तक सरकार बनाम अन्य के खिलाफ चला और संभागीय राजस्व मंडल ने नाईयों की ढाणीवासियों के लिए रास्ता खोलने के आदेश तक दिये हुए है. इसी रास्ते को पक्का करने के लिए मनरेगा में ग्रेवल डालने का काम भी स्वीकृत हो चुका है जो कार्य पुरा नही हुआ और वर्ष 2012 में पीडब्लूडी विभाग द्वारा दो किलोमीटर तक 52.66 लाख की लागत से डामरीकृत सडक़ का निर्माण कर दिया जाना बताया गया है. लेकिन धरातल पर स्वीकृत रास्ते पर कोई सडक़ अस्तीत्व में नही है. पटवारी द्वारा किये गये नक्से में ढाणी में जाने के लिए सडक़ का जो रास्ता दिखाया गया है वहां पर फिलहाल दंबग लोगो की फसले लहरा रही है.

नाईयों की ढ़ाणी में रास्ता नही होनें के कारण ग्रामीणों को अवागमन में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. यदि कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाये तो उसे चारपाई में डालकर सडक़ पर ले जाना पड़ता है. इसी कारण ग्रामीणो ने दिल का दौरा पडने पर गाडी का रास्ता नही होने की वजह से एक व्यक्ति को खो चुके है. जिसका दर्द आज भी ग्रामीणो की आखो में देखा जा सकता है. साथ ही ग्रामीणो का दर्द यह भी है कि ढाणी तक रास्ता नही होने की वजह से लडकियों की पढाई को छुडा दिया जाता है या फिर रिश्तेदारी में भेजकर पढाई करवानी पड़ रही है. ढ़ाणी की महिलाओं ने बताया कि रास्ता नहीं होने के कारण और जब फसले बड़ी हो जाती है. तब डर के मारे बेटीयों को घर से नही निकलते है. इसलिए या तो लड़कियों को रिश्स्तेदारी में भेजकर पढ़ाते है. या फिर हम इन दबंगो से मजबुर होकर पढ़ाई छुडवा देते है.

जब सडक़ निर्माण के बारे में पीडब्लुडी के बुहाना सहायक अभियन्ता अशोक यादव से पूछा गया तो उन्होने गडबडी तो स्वीकार की लेकिन अपना बचाव करते हुए कहा कि मेरी इस जगह जॉइनिंग सडक़ निर्माण के बाद की है. जिससे मुझे इस मामले में कोई जानकारी नही है. दूसरी तरफ पीडब्लुडी के अधिशाषी अभियंता प्रतापसिंह बुडानिया ने सडक़ का निर्माण 2013 में ही पूर्ण होने की बात कही. वही सडक़ पास करने वाले तत्कालिन कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार का कहना है कि मैं सिर्फ सडक़े पास करवाता हूं, निर्माण की जिम्मेवारी पीडब्लुडी के अधिकारीयों की है उन्होने क्या किया है वही जाने.

भोली-भाली जनता को बड़े-बड़े दावे करने वाले नेताओ ने सडक़ को पहुचाने का दावा किया था. लेकिन यह दावे कागजो में तो पूर्ण कर दिये और सडक़ के नाम पर लाखो रूपये डकार लिये. और ग्रामीण देखते के देखते रह गये. प्रधानमंत्री सडक़ योजना में इतना बड़ा घोटाला उजागर होने के बाद अब यह देखने वाली बात होगी घोटाला करने वाले ठेकेदार व पीडब्लुडी के अधिकारीयों पर क्या कार्यवाही होती है. और ढाणवासियों के घर तक कब सडक़ पहुचती है.

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  • Published: 3 years ago on August 12, 2014
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  • Last Modified: August 12, 2014 @ 1:56 am
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. ashok says:

    आप से यही उम्मीद की जाती है

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