/उत्तराखंड में एसोचैम के हवाई दावों की खुली पोल चव्वनी का भी नहीं किया निवेश..

उत्तराखंड में एसोचैम के हवाई दावों की खुली पोल चव्वनी का भी नहीं किया निवेश..

-नारायण परगाईं||

देहरादून उत्तराखंड में एसोचैम ने अब तक कितना निवेश किया है. इस बात का जवाब तो एसोचैम के पास नहीं लेकिन प्रदेश में जल्द ही लाखो लोगो को नौकरी का मौका देने का दावा एसोचैम जरूर कर रहा है.assocham-welcomes-special-package-for-uttarakhand

प्रदेश को बने १४ साल हो गए लेकिन आज तक किसी एक को भी रोजगार दिलाने में एसोचैम फ़ैल साबित हुआ है. लेकिन अब जो दावे किये जा रहे है उन पर पंख कब तक लग पायेगे इस का जवाब एसोचैम के पास भी नहीं है.

लगातार उत्तराखंड में एसोचैम रोज़गार के साथ साथ प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर बात करता रहा है और आज तक एसोचैम सिर्फ उत्तराखंड के लोगो को सपने दिखा कर राजसरकारो को खुश करता आया है. लेकिन प्रदेश के मुखिया हरीश रावत को भी अब एसोचैम ने सब्ज बाग़ दिखा दिए है या फिर दिखाने की तैयारी की जा रही है मगर प्रदेश के मुखिया को अब तक एसोचैम द्वारा उत्तराखंड के लिए किये गए काम का आकलन भी कर लेना चाहिए क्योंकि आज तक एसोचैम उत्तराखंड में कोई भी कारगार काम नहीं कर पाया है.

वहीँ, आज देहरादून के एक बड़े होटल में एसोचैम ने मीडिया को दावत देकर बुलाया था. जहाँ देरी से शुरू हुई प्रेस वार्ता के बाद भी कुछ मीडिया लंच के लिए इंतज़ार करता रहा. जबकि कुछ लोग देरी के कारण वहां से चले गए.

बुलाई गयी प्रेस वार्ता में कुछ मीडिया के लोगों ने एसोचैम से सवाल पूछ कर अपना धरम निभाया बाकि कुछ लोग एसोचैम का प्रवचन सुनते नज़र आये. सवाल ये भी उठ रहा है कि अगर इसी तरह प्रदेश के विकास का दावा हर साल एसोचैम करता रहा तो राज्य में विकास का गंगा तेजी से आनी शुरु हो जाएगी.

इस प्रेस वार्ता को करने के बाद एसोचैम के लोग हवाई यात्रा से वापिस चले गए. उन के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात करने का भी समय नहीं था और सिर्फ प्रेस वार्ता कर के एसोचैम हवाई सेवा से वापिस चले गए.

इस बारे में जब एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डी. एस. रावत से बात की गई तो उनके द्वारा कहा गया कि आज तक एसोचैम ने किसी को रोजगार नहीं दिया है. जबकि एसोचैम प्रदेश में लग रही फैक्ट्री वालों को अपनी कंपनी में जोड़ कर काम करता है. वहीँ, एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डी. एस. रावत एसोचैम की राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष पी. के. जैन ने मीडिया को बताया की उत्तराखण्ड में कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में विकास रूपी प्राणवायु फूंकने की मजबूत और सुनियोजित कार्यप्रणाली अपनाये जाने से अगले पांच साल के दौरान रोजगार के 3.20 लाख अतिरिक्त अवसर उत्पन्न हो सकते हैं. इनमें करीब 30 हजार प्रत्यक्ष और लगभग 2.90 लाख अप्रत्यक्ष अवसर होंगे. एसोसिएटेड चैम्बर्स और कामर्स एण्ड इण्डस्ट्री आफ इण्डिया (एसोचैम) द्वारा कराये गये ताजा अध्ययन में यह तथ्य उभरकर सामने आये हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.