/सोनिया उवाच: मोदीराज में बढ़ी सांप्रदायिक हिंसा..

सोनिया उवाच: मोदीराज में बढ़ी सांप्रदायिक हिंसा..

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा के लिए केंद्र सरकार के सिर ठीकरा फोड़ा है. सोनिया के मुताबिक पिछले 11 हफ्ते में जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है सांप्रदायिक हिंसा के मामले खासकर यूपी में काफी बढ़ गए हैं.Sonia-Gandhi1

सोनिया ने कहा कि ये सबके लिए गंभीर चिंता की बात है. सोनिया ने कहा कि यूपी और महाराष्ट्र में इतने कम वक्त में सांप्रदायिक हिंसा के तकरीबन 600 मामले सामने आए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक यूपीए 1 और यूपीए 2 के कार्यकाल में इस तरह की हिंसा नहीं होती थी. उन्होंने कहा कि सभी दलों को धर्मनिरपेक्ष समाज को बढ़ावा देना चाहिए.

सोनिया के इस बयान पर राजनीतिक दलों में अपनी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि सोनिया गांधी ने जो कहा है वो ठीक कहा है. नई सरकार के आने के बाद कई ऐसी घटनाएं हुई हैं. वहीं बीजेपी की सहयोगी शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस जब से सत्ता से गई है तब से सांप्रदायिक हिंसा कम हुई है.

देश की राजनीति को अगर कांग्रेस इतने साल बाद भी नहीं समझ पाई तो ये उसका दुर्भाग्य है. समाजवादी पार्टी नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार एक तरफ तो कह रही है कि हम उन राज्यों की मदद करेंगे जहां कम्यूनल हिंसा हो रही है और दूसरी तरफ़ खुद ही कम्यूनल हिंसा करा रही है.

बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बांटो और राज करो की नीति पर चलती रही है और आज वो सांप्रदायिक हिंसा बिल की वकालत कर रही है. सदन में चर्चा होने दीजिए, देखते हैं कि कांग्रेस का क्या रुख रहता है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.