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भारतीय मूल के मंजुल को मिला गणित का नोबल कहा जाने फील्ड मैडल..

By   /  August 13, 2014  /  No Comments

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दो भारतीय मूल के शिक्षकों को गणित के क्षेत्र में  ग्लोबल पुरस्कारों से नवाजे जाने की घोषणा की गयी है जिसमें से 1936 में शुरू किये फील्ड मैडल के नाम से दिया जाने वाला गणित का नोबल पुरस्कार भी है. अंतर्राष्ट्रीय गणित संघ के द्वारा सीओल में होने वाली इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय  गणित कांग्रेस में मंजुल भार्गव को गणित का नोबल और सुभाष खोट को रोफ्ल नेवानलिन्ना पुरस्कार दिया जायेगा.Indian Origin Manjul Bhargava Wins  Nobel Prize of Maths

मंजुल भार्गव जो कि प्रिन्सटन  विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर हैं, उन चार लोगों में शामिल हैं जिन्हें हर चार वर्ष मैं दिया जाने वाला फील्ड मैडल देने के लिए चुना गया है.इनके साथ ईरानी मूल की मरयम मिर्ज़ाखानी इस पुरस्कार को जीतने वाली पहली महिला भी बनी हैं.

मंजुल को ये पुरस्कार ज्योमिती के क्षेत्र में नए और असरदार तरीके की खोज के लिए दिया गया है जिनकी मदद सूक्ष्म रिंग्स की गणना और एल्लिप्टिक कर्व की औसत रैंक को बाँधने के लिए ली जा सकती हैं. पुरस्कार चयन समिति के अनुसार, भार्गव का काम गूढ़ अंकगणितीय समझ और उनके प्रस्तुतीकरण की अद्भुत समझ और बीजगणितीय विश्लेषण की प्रखरता को दर्शाता है.

1974 में कनाडा में जन्में भार्गव अमेरिका में पले बढे और भारत में भी अच्छा खासा समय गुज़ारा. साल 2001 में उन्होंने प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी मिलने के बाद साल 2003 में वहीँ प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हो गए. मंजुल भार्गव इसके पहले भी अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम कर चुके हैं जैसे 2003 में अमेरिकन एसोसिएशन का मेर्टेन हस्से पुरस्कार, 2005 में शास्त्र रामानुजन पुरस्कार, 2008 में अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी का नंबर थ्योरी के लिए दिया गया कोल पुरस्कार और 2012 में इनफ़ोसिस पुरस्कार. इन्हें साल 2013 में यूएस अकैडेमी ऑफ़ साइंस में शामिल किया गया है.

फील्ड मैडल हर अंतर्राष्ट्रीय गणित कांग्रेस में गणित के क्षेत्र में अतुलनीय और भविष्य की दिशा में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया जाता है. नामांकित व्यक्ति का चालीस वर्ष से कम आयु का होना इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त होती है.

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  • Published: 3 years ago on August 13, 2014
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  • Last Modified: August 13, 2014 @ 3:11 pm
  • Filed Under: प्रतिभा

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